
देश में लगातार हो रहे छात्र आंदोलनों और युवाओं के बदलते सियासी मिजाज के बीच आए सी-वोटर (CVoter) के नए स्नैप पोल ने भारत की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अक्सर यह चर्चा होती है कि देश का युवा—विशेषकर जेन-जी (Gen-Z: 18 से 35 वर्ष का आयु वर्ग)—भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) की तरफ झुका हुआ है या फिर कांग्रेस व क्षेत्रीय दलों के ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन को पसंद करता है। सी-वोटर के सर्वे के नतीजे बताते हैं कि देश का नया वोटर किसी भी राजनीतिक गुट से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है।
सर्वे में शामिल लगभग 58.7 प्रतिशत युवाओं ने दोटूक कहा कि राजनीतिक पार्टियां जेन-जी की प्राथमिकताओं और चिंताओं को नहीं समझती हैं। केवल 20.7 फीसदी युवाओं का मानना था कि पार्टियां उनकी बात समझती हैं, जबकि 20.5 फीसदी लोगों ने इस पर कोई स्पष्ट राय नहीं दी।
दिलचस्प बात यह है कि राजनीतिक दलों से यह मोहभंग किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं है:
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एनडीए समर्थकों में: बीजेपी व उसके सहयोगी दलों का समर्थन करने वाले युवाओं में से भी 54 फीसदी ने स्वीकार किया कि राजनीतिक दल जेन-जी की सोच से मेल नहीं खाते।
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विपक्ष/इंडिया गठबंधन समर्थकों में: विपक्षी खेमे का समर्थन करने वाले युवाओं में यह निराशा और भी अधिक है, जहाँ 64 फीसदी युवाओं ने माना कि पार्टियां उनके वास्तविक मुद्दों से कटी हुई हैं।
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अन्य दलों के समर्थकों में: लगभग 58.5 फीसदी युवाओं ने भी यही राय जाहिर की।
पार्टी या नेता नहीं, ‘मुद्दों’ और ‘युवा चेहरों’ पर दांव लगाना चाहती है Gen-Z
सी-वोटर के 1,270 युवाओं पर किए गए इस सर्वे से यह साफ जाहिर होता है कि भारत का नया वोटर भावुक या पारंपरिक नारों की बजाय बेहद व्यावहारिक (Pragmatic) मुद्दों को प्राथमिकता दे रहा है। जब युवाओं से उनके सबसे अहम चुनावी मुद्दों के बारे में पूछा गया, तो आंकड़े इस प्रकार रहे:
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रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य (53%): आधे से ज्यादा युवाओं के लिए दैनिक जीवन से जुड़े रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं चुनाव का सबसे बड़ा आधार हैं।
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महंगाई (13.1%): बढ़ती महंगाई युवाओं के लिए दूसरा सबसे बड़ा चिंता का विषय है।
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भ्रष्टाचार (11.9%): तीसरे नंबर पर प्रशासनिक व चुनावी भ्रष्टाचार का मुद्दा है।
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अन्य मुद्दे: बिजली, पानी और सड़क जैसे बुनियादी ढांचे को 8.2%, कानून-व्यवस्था व महिला सुरक्षा को 4.8% और राष्ट्रीय सुरक्षा को केवल 2.7% युवाओं ने अपना प्राथमिक चुनावी मुद्दा बताया।
वोट देने का मुख्य आधार क्या होगा?
पारंपरिक रूप से भारत में चुनाव पार्टी के सिंबल या जातिगत निष्ठा पर लड़े जाते रहे हैं, लेकिन जेन-जी इस ढर्रे को तोड़ती नजर आ रही है:
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33.3% युवा केवल “ठोस मुद्दों” के आधार पर अपना वोट तय करेंगे।
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20% युवा शीर्ष नेता के चुनाव/छवि को देखकर वोट देंगे।
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13.9% युवा राजनीतिक पार्टी के आधार पर वोट देंगे।
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7.7% युवा स्थानीय उम्मीदवार की छवि को प्राथमिकता देंगे।
युवा और शिक्षित प्रतिनिधियों की भारी मांग
संसद और विधानसभाओं में जनप्रतिनिधियों की बढ़ती औसत उम्र के बीच जेन-जी की राय बिल्कुल स्पष्ट है। सर्वे में शामिल 74.6 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि यदि राजनीतिक दल चुनाव में युवा उम्मीदवारों को टिकट देते हैं, तो वे उन्हें वोट देना पसंद करेंगे। इसके अलावा, 59.5 फीसदी युवाओं ने माना कि उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता उनके लिए वोट तय करने का बहुत महत्वपूर्ण कारक है।
राष्ट्रवाद बनाम जातिगत राजनीति
सर्वे में सोशल इंजीनियरिंग और पहचान की राजनीति को लेकर भी अहम रुझान सामने आए:
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राष्ट्रवाद: लगभग 49.5 प्रतिशत युवाओं ने माना कि राष्ट्रवाद उनके वोटिंग फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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जातिगत राजनीति का घटता प्रभाव: केवल 24.4 फीसदी युवाओं ने अपनी ही जाति के उम्मीदवार को वोट देने की बात कही, जबकि 48.2 फीसदी युवाओं ने साफ तौर पर जाति आधारित वोटिंग को खारिज कर दिया।
सोशल मीडिया का असर
आज की युवा पीढ़ी के लिए सूचना का प्राथमिक स्रोत सोशल मीडिया है। सर्वे के अनुसार, 49.3 प्रतिशत युवाओं ने स्वीकार किया कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म उनकी राजनीतिक राय बनाने और बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सी-वोटर का यह सर्वे एनडीए और इंडिया गठबंधन—दोनों ही बड़े राजनीतिक धड़ों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी और संकेत है। भारत का नया और युवा मतदाता केवल पार्टी के बड़े चेहरों या पारंपरिक बयानों से प्रभावित होने वाला नहीं है; उसे अपनी नौकरियों, पारदर्शी परीक्षा प्रणालियों, बेहतर शिक्षा और आधुनिक अवसरों पर ठोस काम चाहिए। जो भी राजनीतिक दल या गठबंधन जेन-जी के इन वास्तविक मुद्दों को समझेगा और उन्हें आगे बढ़ाएगा, 2026-2027 के आगामी विधानसभा चुनावों और भविष्य की राजनीति की कुंजी उसी के पास होगी।
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