केबीसी के मंच पर पहुंचे दुनिया के सबसे छोटे डॉक्टर, 3 फीट के डॉ. गणेश बरैया का जज्बा देख अमिताभ बच्चन भी हुए नतमस्तक; जीत लिया करोड़ों भारतीयों का दिल

टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय और प्रतिष्ठित गेम शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) का मंच केवल ज्ञान और धन जीतने का जरिया नहीं है, बल्कि यह देश के कोने-कोने से आने वाले उन जांबाज इंसानों की कहानियों को सामने लाने का मंच भी है जिन्होंने अपनी अटूट इच्छाशक्ति से नियति को भी झुकने पर मजबूर कर दिया। हाल ही में इस ऐतिहासिक मंच पर कुछ ऐसा ही भावुक और रोंगटे खड़े कर देने वाला नजारा देखने को मिला, जब हॉट सीट पर महानायक अमिताभ बच्चन के सामने दुनिया के सबसे छोटे डॉक्टर के रूप में विख्यात गुजरात के डॉ. गणेश बरैया पहुंचे। महज तीन फीट के कद वाले इस युवा डॉक्टर ने अपनी जिंदगी के संघर्षों, सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई और सफेद कोट पहनने के सपने को पूरा करने की जो गाथा सुनाई, उसने न केवल सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की आंखों में नमी ला दी, बल्कि स्टूडियो में मौजूद हर एक दर्शक को खड़े होकर तालियां बजाने पर विवश कर दिया।

तीन फीट के डॉ. गणेश बरैया: चुनौतियों को बौना साबित करने वाली असाधारण दास्तान

गुजरात के भावनगर जिले के तलोजा तालुका के गोरखी गांव में जन्मे डॉ. गणेश बरैया का जीवन बचपन से ही असामान्य चुनौतियों से भरा रहा था। जन्म के समय और शुरुआती वर्षों में ही जब डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर का विकास सामान्य बच्चों की तरह नहीं हो पाएगा, तो समाज के कई लोगों ने उनके भविष्य को लेकर निराशावादी बातें कहीं। जब वे बड़े हुए तो उनका कद महज 3 फीट यानी लगभग 72 सेंटीमीटर पर ही थम गया और उनका वजन भी बहुत कम रहा।

शारीरिक सीमाओं और समाज के तानों के बावजूद गणेश और उनके परिवार ने कभी हार नहीं मानी। साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले गणेश के पिता एक किसान हैं, लेकिन उन्होंने अपने बेटे के सपनों पर कभी कद की सीमाओं को हावी नहीं होने दिया। गणेश बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहे और उनका एकमात्र सपना था कि वे एक दिन डॉक्टर बनकर जरूरतमंद और गरीब लोगों की सेवा करेंगे। 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 87 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि दिमाग और हौसले का शारीरिक ऊंचाई से कोई वास्ता नहीं होता।

जब मेडिकल काउंसिल ने रोका रास्ता: सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई

डॉ. गणेश बरैया का डॉक्टर बनने का सफर किसी भी सामान्य छात्र से हजार गुना ज्यादा कठिन था। साल 2018 में जब उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) उत्तीर्ण कर ली और मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए आवेदन किया, तो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) की समिति ने उनके तीन फीट के कद और 70 प्रतिशत शारीरिक दिव्यांगता का हवाला देते हुए उन्हें एमबीबीएस कोर्स के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। समिति का तर्क था कि कम कद के कारण वे इमरजेंसी केसेस और ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी जैसे आपातकालीन कार्य नहीं कर पाएंगे।

यह फैसला किसी भी आम इंसान को पूरी तरह तोड़ देने के लिए काफी था, लेकिन गणेश ने अपने अधिकारों के लिए लड़ने का फैसला किया। वे अपने स्कूल के प्रिंसिपल और वकीलों की मदद से पहले गुजरात हाई कोर्ट और फिर देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी भी छात्र को केवल उसके कद या शारीरिक बनावट के आधार पर मेडिकल की शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने न केवल गणेश के लिए मेडिकल कॉलेज के दरवाजे खोले, बल्कि देश भर के दिव्यांग छात्रों के लिए एक नई उम्मीद की किरण जगाई। इसके बाद गणेश ने भावनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस सफलतापूर्वक पूरा कर इंटर्नशिप की और आधिकारिक रूप से डॉक्टर बने।

केबीसी के मंच पर अमिताभ बच्चन भी हुए नतमस्तक: भावुक कर देने वाला वो पल

जब डॉ. गणेश बरैया केबीसी के मंच पर पहुंचे, तो स्वयं अमिताभ बच्चन उनके स्वागत के लिए अपनी सीट से उठकर आगे आए। बिग बी ने जिस आदर और सम्मान के साथ डॉ. गणेश का हाथ थामा, उसने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया। खेल के दौरान जब डॉ. गणेश ने अपनी कानूनी लड़ाई और एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान आई व्यावहारिक दिक्कतों का जिक्र किया, तो अमिताभ बच्चन अत्यंत भावुक हो गए।

अमिताभ बच्चन ने डॉ. गणेश के जज्बे को सलाम करते हुए कहा कि वे कद में भले ही छोटे हों, लेकिन अपने कर्म, साहस और संकल्प में देश के सबसे ऊंचे इंसानों में से एक हैं। बिग बी ने कहा कि डॉ. गणेश का यह सफर पूरे देश के युवाओं के लिए एक जिंदा मिसाल है कि अगर आपके भीतर कुछ कर गुजरने की आग है, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको आपकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। शो के दौरान डॉ. गणेश के आत्मविश्वास, चेहरे की मुस्कान और सवालों के सटीक उत्तर देने की शैली ने यह साफ कर दिया कि वे एक असाधारण व्यक्तित्व के धनी हैं।

स्टेथोस्कोप और सफेद कोट में आत्मविश्वास: मरीजों के मसीहा बने डॉ. गणेश

डॉ. गणेश बरैया आज जब अपने गले में स्टेथोस्कोप डालकर और सफेद कोट पहनकर अस्पताल की ओपीडी में बैठते हैं, तो उनका आत्मविश्वास देखने लायक होता है। शुरुआत में जब मरीज उनके पास आते थे, तो उनके छोटे कद को देखकर थोड़े झिझकते थे या आश्चर्यचकित रह जाते थे। लेकिन जैसे ही डॉ. गणेश उनसे प्यार से बात करते हैं, उनकी बीमारी का सटीक निदान करते हैं और दवाइयां लिखते हैं, मरीजों का संकोच तुरंत अटूट विश्वास और श्रद्धा में बदल जाता है।

डॉ. गणेश बताते हैं कि जब मरीज ठीक होकर उनके हाथ जोड़ते हैं और दुआएं देते हैं, तो उन्हें लगता है कि उनकी सारी तपस्या और सुप्रीम कोर्ट तक की दौड़-धूप सफल हो गई। वे मानते हैं कि एक डॉक्टर का सबसे बड़ा गुण उसकी संवेदनशीलता, सुनने की क्षमता और सही फैसला लेने की समझ होती है, और यह सब शारीरिक कद से नहीं बल्कि दिल और दिमाग की परिपक्वता से तय होता है।

हर दिव्यांग और संघर्षरत युवा के लिए प्रेरणा: समाज को दिया हौसले का नया मंत्र

केबीसी के इस खास एपिसोड ने पूरे देश के सोशल मीडिया और जनमानस में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। डॉ. गणेश की कहानी केवल एक डॉक्टर बनने की दास्तान नहीं है, बल्कि यह उन तमाम भ्रांतियों और रूढ़ियों पर करारा तमाचा है जो शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को समाज में कमजोर मानती हैं।

डॉ. गणेश ने मंच से देश के करोड़ों युवाओं और दिव्यांग भाई-बहनों को एक स्पष्ट संदेश दिया कि कभी भी परिस्थितियों के आगे घुटने मत टेको। उन्होंने कहा कि जब दुनिया आपके रास्ते में दीवारें खड़ी करे, तो उन दीवारों को सीढ़ी बनाकर अपनी मंजिल की तरफ कदम बढ़ाओ। उनकी यह सकारात्मकता और निस्वार्थ सेवा भाव आज लाखों लोगों को अपनी असफलताओं और मुश्किलों से लड़कर आगे बढ़ने का हौसला दे रही है।

देश और दुनिया के दिलों पर अमिट छाप: केबीसी के मंच से गूंजा जीत का संदेश

‘कौन बनेगा करोड़पति’ के इस यादगार एपिसोड ने टेलीविजन के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ दी है। डॉ. गणेश बरैया का यह सफर साबित करता है कि इंसान अपनी शारीरिक बनावट से नहीं, बल्कि अपने सपनों की ऊंचाई और अपने कर्मों की महानता से बड़ा बनता है।

अमिताभ बच्चन के सामने बैठकर अपनी जीत की कहानी सुनाने वाले डॉ. गणेश बरैया आज न केवल गुजरात या भारत के, बल्कि पूरी दुनिया के उन तमाम लोगों के हीरो बन चुके हैं जो किसी न किसी शारीरिक या सामाजिक बाधा से जूझ रहे हैं। उनका यह ऐतिहासिक सफर आने वाली कई पीढ़ियों को यह याद दिलाता रहेगा कि असंभव कुछ भी नहीं है, बशर्ते आपके सीने में उम्मीद की मशाल जलती रहे।

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