
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सेवान और तीखे बयानों का दौर शुरू हो चुका है, जहाँ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने राज्य की शिंदे-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन सरकार पर जोरदार हमला बोला है। सुप्रिया सुले ने हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार की कार्यप्रणाली और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने सीधे तौर पर यह मुद्दा उठाया कि राज्य में दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं, जहाँ एक तरफ मामूली मामलों में पुलिस और प्रशासन तुरंत हरकत में आ जाता है, वहीं दूसरी तरफ एक बड़े और संवेदनशील मामले में अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। उनके इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है और विपक्षी दलों के साथ-साथ आम जनता के बीच भी इस पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अमित ठाकरे पर तुरंत एफआईआर और अजित पवार के प्लेन क्रैश पर सन्नाटा क्यों?
सुप्रिया सुले ने अपने संबोधन के दौरान सबसे पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता अमित ठाकरे के खिलाफ हाल ही में दर्ज हुई एफआईआर का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पुणे के एक सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर दीवार से हटाने के मामले में पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अमित ठाकरे के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। इस त्वरित कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि सरकार ने एक तस्वीर हटाने जैसे मामले में इतनी तत्परता दिखाई, लेकिन जब राज्य के एक कद्दावर नेता और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार का एक भीषण विमान हादसा हुआ, जिसमें उनकी दुखद मौत हो गई, तो उस पर आज तक कोई एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई? उन्होंने सरकार की इस कार्यशैली को पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण करार देते हुए पूछा कि न्याय के पैमाने हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग क्यों हैं।
अजित पवार के परिवार का दर्द और सत्ताधारी गुट के नेताओं की चुप्पी पर सवाल
इस दौरान सुप्रिया सुले बेहद भावुक नजर आईं और उन्होंने अपने भाई अजित पवार के निधन और उसके बाद की परिस्थितियों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण सदस्य खो दिया है, जो उनके लिए एक अपूरणीय क्षति है। सुप्रिया सुले ने वर्तमान सरकार में शामिल अजित पवार के धड़े (एनसीपी गुट) के नेताओं और विधायकों पर भी तीखा निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि अजित पवार की पार्टी के जो 40 विधायक और 8 से 9 मंत्री इस समय सत्ता का आनंद ले रहे हैं, क्या उनमें से किसी ने भी आज तक यह मांग करने की जहमत उठाई कि इस विमान हादसे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए? उन्होंने आरोप लगाया कि अपने भाई के जाने के बाद भी सत्ता में बैठे लोग केवल अपनी कुर्सियों का आनंद लेने में व्यस्त हैं और किसी के पास भी इस मामले पर खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं बची है।
ठाणे के महंगे प्रोजेक्ट्स और खराब सड़कों को लेकर सरकार पर तीखा हमला
केवल राजनीतिक मामलों तक ही सीमित न रहते हुए, सुप्रिया सुले ने ठाणे और पूरे महाराष्ट्र में चल रही विकास परियोजनाओं और बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने ठाणे में प्रस्तावित मल्टी-करोड़ रिंग मेट्रो प्रोजेक्ट और अमेज़न डेटा सेंटर परियोजना का कड़ा विरोध किया। स्थानीय नागरिकों की चिंताओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जनता इन महंगी परियोजनाओं के पक्ष में नहीं है। रिंग मेट्रो के विकल्प पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि जिस काम को बेहतर बस कनेक्टिविटी के जरिए कम लागत में पूरा किया जा सकता है, उसके लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च करने की क्या आवश्यकता है? उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार केवल महंगे प्रोजेक्ट्स और विज्ञापनों पर ध्यान देती है, जबकि गरीबों, वंचितों और आम जनता की बुनियादी जरूरतों के लिए खजाने में कोई पैसा नहीं है। इसके अलावा, राज्य भर की सड़कों की बदहाल स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज पूरे महाराष्ट्र में सड़कों पर गड्ढे नहीं बल्कि गड्ढों के बीच थोड़ी बहुत सड़क बची हुई है, जिससे आम जनता को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अर्थव्यवस्था के दावों और जीडीपी के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में सुप्रिया सुले ने देश और राज्य की अर्थव्यवस्था की स्थिति पर भी केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सरकार जीडीपी विकास के आंकड़ों को लेकर जश्न मना रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। देश के जाने-माने आर्थिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट्स और सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के बीच एक बहुत बड़ा अंतर और विरोधाभास देखने को मिल रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक मंदी के दौर में आम आदमी की जेब पर लगातार डाका पड़ रहा है, लेकिन सरकार अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए केवल कागजी आंकड़ों का सहारा ले रही है। सुप्रिया सुले के इन तमाम तीखे बวानों ने आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए भूचाल के संकेत दे दिए हैं, और यह देखना दिलचस्प होगा कि सत्ता पक्ष इन सवालों का क्या जवाब देता है।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया