‘भारत और अमेरिका के मजबूत रिश्तों से जलते हैं बाकी देश, PM मोदी से मिलने को सबसे ज्यादा उत्सुक हैं राष्ट्रपति ट्रंप’

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच रणनीतिक, व्यापारिक और रक्षा संबंधों की बढ़ती गहराई को लेकर भारत में नवनियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक अत्यंत बेबाक और बड़ा बयान दिया है। नई दिल्ली में एक विशेष साक्षात्कार के दौरान राजदूत ने कहा कि आज भारत और अमेरिका के बीच जो असाधारण भरोसा और तालमेल कायम हुआ है, उसे देखकर दुनिया के बाकी देश ईर्ष्या (Jealous) महसूस करते हैं। गोर ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिन वैश्विक नेताओं से संवाद करने और व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए सबसे ज्यादा उत्सुक रहते हैं, उस फेहरिस्त में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शीर्ष स्थान पर हैं।

राजदूत ने कहा कि यदि आप राष्ट्रपति से पूछें कि किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर से 35 शीर्ष राष्ट्राध्यक्ष आ रहे हैं और वे उनमें से सबसे पहले किससे मिलना चाहेंगे, तो राष्ट्रपति ट्रंप की जुबान पर बिना किसी हिचकिचाहट के पहला नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही होगा। दोनों नेताओं के बीच स्थापित व्यक्तिगत कैमिस्ट्री का उल्लेख करते हुए गोर ने संकेत दिया कि आगामी दिसंबर में फ्लोरिडा में आयोजित होने वाले जी-20 (G20) शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली बातचीत महज एक सामान्य बहुपक्षीय बैठक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह उससे कहीं आगे बढ़कर दोनों देशों के रिश्तों को एक नई ऐतिहासिक ऊंचाई पर ले जाने वाली साबित होगी।

2020 के दौरे को आज भी गर्मजोशी से याद करते हैं ट्रंप: अगले साल भारत आने के संकेत

राजदूत सर्जियो गोर ने खुलासा किया कि जब भी उनकी राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत होती है, वे वर्ष 2020 में अपनी आधिकारिक भारत यात्रा (‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम) को बेहद आत्मीयता और गर्व से याद करते हैं। ट्रंप अक्सर उस दौरान भारत की जनता से मिले गर्मजोशी भरे स्वागत और अपने ‘प्रिय मित्र’ प्रधानमंत्री मोदी के साथ बिताए पलों की चर्चा करते हैं।

अमेरिकी राजदूत ने इस बात के भी मजबूत संकेत दिए कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान दोबारा भारत के आधिकारिक दौरे पर आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सरकारों के बीच तालमेल इतना सघन हो चुका है कि आने वाले समय में उच्च स्तरीय दौरों की एक पूरी श्रृंखला देखने को मिलेगी। राजदूत ने पुष्टि की कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो आगामी अक्टूबर महीने में एक बार फिर भारत यात्रा पर आ रहे हैं। यह अपने आप में दुर्लभ है कि कोई अमेरिकी विदेश मंत्री इतने कम समय में दो बार नई दिल्ली का दौरा करे। इसके अलावा, अमेरिका के तीन बड़े राज्यों के गवर्नर भी इस साल के अंत तक भारत का दौरा करेंगे, जबकि भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के भी अगले चार महीनों में संयुक्त राष्ट्र और जी20 के सिलसिले में अमेरिका की यात्राओं की संभावना है।

अंतिम चरण में पहुंची ऐतिहासिक ‘ट्रेड डील’: 500 अरब डॉलर के व्यापार का रोडमैप

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (Trade Agreement) पर बात करते हुए सर्जियो गोर ने एक बड़ी राहत भरी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले के बाद व्यापार वार्ता के कुछ कानूनी पहलुओं पर दोनों पक्ष दोबारा काम कर रहे हैं, लेकिन दोनों देश एक अंतिम व्यापक समझौते के बेहद करीब (Very Close) पहुंच चुके हैं।

राजदूत ने कहा कि जहां यूरोपीय संघ जैसे अन्य साझेदारों के साथ ट्रेड वार्ताओं में 20-20 साल लग जाते हैं, वहीं भारत और अमेरिका के बीच बातचीत बहुत तेज गति से आगे बढ़ी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले कुछ ही महीनों के भीतर इस व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। वर्तमान समय में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 240 अरब डॉलर के स्तर पर है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने अगले कुछ वर्षों में बढ़ाकर 500 अरब डॉलर (लगभग 41 लाख करोड़ रुपये से अधिक) तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। गोर ने रेखांकित किया कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के प्रयासों से हाल ही में 24 अरब डॉलर का नया भारतीय निवेश अमेरिका में सुरक्षित किया गया है, जबकि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी टेक दिग्गज कंपनियां भारत में डेटा सेंटर्स और एआई हब का अभूतपूर्व विस्तार कर रही हैं।

‘सिर्फ हथियारों की बिक्री नहीं, यह भरोसे का रिश्ता है’: रक्षा क्षेत्र में मजबूत साझेदारी

रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर बोलते हुए राजदूत ने भारत को अमेरिका का सबसे ‘विश्वसनीय रक्षा साझेदार’ (Trusted Defence Partner) करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच रक्षा संबंध केवल सैन्य साजो-सामान खरीदने और बेचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह गहरे रणनीतिक भरोसे पर आधारित हैं। अमेरिका अपने सबसे संवेदनशील सैन्य उपकरण हर किसी देश को नहीं बेचता।

उन्होंने अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी, जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों के संयुक्त सह-उत्पादन और लड़ाकू विमानों के जीई-414 जेट इंजनों के भारत में निर्माण से जुड़ी वार्ताओं को इस भरोसे का जीवंत प्रमाण बताया। राजदूत ने इस बात को भी रेखांकित किया कि भारतीय सशस्त्र बल दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे ज्यादा संयुक्त द्विपक्षीय और बहुपक्षीय युद्धाभ्यास अकेले अमेरिकी सेना के साथ आयोजित करते हैं।

‘पीएम मोदी भारत में लाए स्थिरता’: क्वाड और वैश्विक संतुलन में अहम भूमिका

सर्जियो गोर ने भारत के आंतरिक नेतृत्व और आर्थिक विकास की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में एक असाधारण राजनीतिक और नीतिगत स्थिरता कायम की है। उन्होंने कहा, “भारत का मजबूत और आर्थिक रूप से समृद्ध होना अमेरिका के अपने राष्ट्रीय हितों के लिए बेहतरीन है। हम एक स्थिर और सशक्त भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।”

इसके अतिरिक्त, हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में सुरक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था को बनाए रखने के लिए चतुर्भुज सुरक्षा संवाद यानी ‘क्वाड’ (Quad) के शीर्ष नेताओं की शिखर बैठक को लेकर भी अमेरिका पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राजदूत के अनुसार, भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के चारों शीर्ष नेता नियमित रूप से संपर्क में हैं और अगला स्वाभाविक कदम सभी का एक मेज पर एक साथ बैठना होगा। अमेरिकी राजदूत का यह बयान साफ करता है कि बदलती वैश्विक भू-राजनीति के बीच वाशिंगटन और नई दिल्ली का गठबंधन अब केवल दो देशों का द्विपक्षीय मंच नहीं, बल्कि 21वीं सदी की वैश्विक व्यवस्था को दिशा देने वाली सबसे प्रभावशाली शक्ति बन चुका है।

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