
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पावन पर्व मनाया जाता है। इस साल व्रत की तारीख को लेकर महिलाओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि व्रत 13 सितंबर को रखा जाए या 14 सितंबर को। इस दुविधा का मुख्य कारण तृतीया तिथि के आरंभ और समापन का समय है। तृतीया तिथि की शुरुआत 13 सितंबर को सूर्योदय के बाद सुबह 07:21 बजे हो रही है, जबकि इसका समापन 14 सितंबर को सुबह 07:19 बजे होगा। ऐसे में पंचांग गणना के दो अलग-अलग नियमों के कारण तारीखों को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं।
उदयातिथि बनाम लोक परंपरा: किस दिन रखें निर्जला व्रत?
हिंदू धर्म में व्रत और पर्व के निर्धारण के लिए दो मुख्य आधार माने जाते हैं: शास्त्रीय उदयातिथि नियम और क्षेत्रीय लोक परंपरा।
शास्त्रों के अनुसार किसी भी व्रत के संकल्प और उद्यापन में उदयातिथि का मान सर्वोपरि होता है। चूंकि 14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए उदयातिथि के सिद्धांत के आधार पर हरतालिका तीज का मुख्य व्रत 14 सितंबर को रखना ही शास्त्रसम्मत और उत्तम माना गया है।
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई क्षेत्रों में लोक परंपरा को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। इन परिवारों में मान्यता है कि हरतालिका तीज की मुख्य पूजा और कथा का श्रवण पूर्ण रूप से तृतीया तिथि के भीतर ही संपन्न होना चाहिए। चूंकि 13 सितंबर को सुबह 07:21 बजे के बाद पूरा दिन और प्रदोष काल तृतीया तिथि में ही रहेगा, इसलिए जो परिवार लोक परंपरा का अनुसरण करते हैं, वे 13 सितंबर को व्रत और रात्रि जागरण का अनुष्ठान कर सकते हैं। वहीं जो लोग 14 सितंबर को व्रत रखेंगे, वे सुबह 07:19 बजे से पहले ही अपनी मुख्य पूजा संपन्न कर सकते हैं।
शिवलिंग और माता पार्वती की पूजन सामग्री की पूरी सूची
हरतालिका तीज की पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती की कच्ची मिट्टी या बालू से प्रतिमा बनाकर विधिवत पूजन करने का विधान है। पूजन के दौरान दोनों देवों को उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित की जाती हैं।
भगवान शिव के पूजन के लिए आवश्यक सामग्री:
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गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी और शहद (पंचामृत हेतु)
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बेलपत्र, शमी का पत्ता, धतूरा और भांग
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सफेद चंदन, अक्षत, काला तिल और हरी मूंग दाल
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ताजे फूल और मौसमी फल
माता पार्वती के श्रृंगार और अर्पण हेतु सामग्री:
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लाल चुनरी या वस्त्र और कलावा
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सिंदूर अथवा लाल चंदन
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हरी चूड़ियां और लाल बिंदी
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सुगंधित पुष्प और ताजे फल
दांपत्य सुख और शीघ्र विवाह के लिए 4 महाउपाय
हरतालिका तीज का व्रत केवल अखंड सौभाग्य की रक्षा ही नहीं करता, बल्कि जीवन की अन्य बाधाओं को भी शांत करता है। इस दिन विशेष फल प्राप्ति के लिए ये चार उपाय अत्यंत लाभकारी माने गए हैं:
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पंचामृत अभिषेक और माता पार्वती का श्रृंगार: वैवाहिक जीवन में मधुरता और खुशहाली बनाए रखने के लिए शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से पंचामृत अभिषेक करें। इसके बाद माता पार्वती को 16 श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें।
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शिव-गौरी की संयुक्त पूजा: यदि विवाह में अनावश्यक देरी हो रही हो या दांपत्य जीवन में तनाव चल रहा हो, तो इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त रूप से पूजा करें और संभव हो तो निर्जला अथवा फलाहार व्रत रखकर प्रार्थना करें।
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हरे रंग के परिधान का चयन: इस पावन दिन हरे रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है। हरा रंग प्रकृति, सुख और वैवाहिक समृद्धि का प्रतीक है।
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व्रत कथा का श्रवण: पूजा के समय हरतालिका तीज व्रत कथा का पाठ करना या एकाग्रचित्त होकर सुनना अनिवार्य माना जाता है। शास्त्रीय मान्यता है कि कथा सुने बिना इस कठिन तपस्या का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
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