‘NEET पेपर लीक से मरे बच्चे, क्या गलती थी उनकी?’: परीक्षा धांधली पर हाईकोर्ट का फूटा गुस्सा

देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) में पेपर लीक, ग्रेस मार्क्स विवाद और धांधली के मामलों को लेकर न्यायिक गलियारों में सख्त रुख देखने को मिला है। परीक्षा संचालन में हुई भारी लापरवाहियों और व्यवस्थागत खामियों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय (High Court) ने परीक्षा एजेंसी और प्रशासनिक अधिकारियों को आड़े हाथों लिया।

अदालत ने सुनवाई के दौरान बेहद भावुक और कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए परीक्षा नियामक संस्था के शीर्ष अधिकारी को सीधे कटघरे में खड़ा किया। कोर्ट ने कहा कि पेपर लीक और व्यवस्था की नाकामी के चलते मानसिक तनाव और डिप्रेशन में आकर कई मासूम छात्र-छात्राओं ने अपनी जान गंवा दी। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा, “जो बच्चे अवसाद और हताशा में मर गए, आखिर उनकी क्या गलती थी? व्यवस्था की इस आपराधिक लापरवाही का जवाबदेह कौन है?”

‘लाखों बच्चों के भविष्य और मेहनत के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं’

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले छात्र सालों तक दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों की कोचिंग और पढ़ाई के लिए जीवनभर की जमा-पूंजी लगा देते हैं। ऐसे में जब कुछ असामाजिक तत्वों और परीक्षा तंत्र की मिलीभगत से पर्चा पहले ही लीक हो जाता है, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और भरोसे की हत्या है।

अदालत ने फटकार लगाते हुए कहा कि परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्थाएं अपनी विफलता पर पर्दा डालने के लिए महज तकनीकी और गोलमोल दलीलें पेश कर रही हैं। कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा कि छात्रों का प्रणाली से भरोसा उठ जाना देश के भविष्य के लिए सबसे खतरनाक संकेत है और अदालत इसे मूकदर्शक बनकर नहीं देख सकती।

जांच एजेंसियों और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल

कोर्ट ने मामले में शामिल सिंडिकेट, सॉल्वर गैंग और परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जांच की गति पर भी असंतोष जताया:

  • सॉल्वर गैंग पर शिकंजा: कोर्ट ने पूछा कि जब परीक्षा की गोपनीयता के लिए कड़े नियम और डिजिटल लॉकर की व्यवस्था थी, तो प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों से पहले माफियाओं के हाथों तक कैसे पहुंच गया?

  • जिम्मेदार अधिकारियों की शिथिलता: शीर्ष अधिकारी को फटकार लगाते हुए अदालत ने पूछा कि पहली शिकायत मिलने पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? आंतरिक ऑडिट और निगरानी में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?

  • ग्रेस मार्क्स का मनमाना फॉर्मूला: अदालत ने ग्रेस मार्क्स बांटने और परीक्षा परिणामों में अचानक आए अस्वाभाविक उछाल को लेकर भी अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा और पूछा कि क्या इस तरह के फॉर्मूले तय करते समय नियमों का पारदर्शी पालन किया गया था?

व्यवस्थागत सुधार और सख्त जवाबदेही तय करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग और जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे मामले की तह तक जाकर उन सभी कड़ियों को बेनकाब करें जिन्होंने इस राष्ट्रव्यापी घोटाले को अंजाम दिया। कोर्ट ने दो टूक कहा कि केवल छोटे मोहरों को पकड़ने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन बड़े अधिकारियों और सिंडिकेट के सरगनाओं पर भी गैर-जमानती धाराओं के तहत कार्रवाई होनी चाहिए जिनकी छत्रछाया में यह खेल चला।

अदालत ने परीक्षा प्रणाली में बुनियादी बदलाव करने, पारदर्शी डिजिटल सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने और पीड़ित छात्रों की शिकायतों के निवारण के लिए एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति के गठन पर भी बल दिया। इस सख्त रुख से साफ है कि न्यायपालिका अब प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता को लेकर किसी भी स्तर की प्रशासनिक लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

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