हरतालिका तीज 2026: व्रत के दिन भूलकर भी न करें ये 5 बड़ी गलतियां, वरना नहीं मिलेगा सुहाग का अखंड सौभाग्य और व्रत का पूरा फल

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का महापर्व बेहद उत्साह और निष्ठा के साथ मनाया जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस कठिन व्रत को रखने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और उनके वैवाहिक जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। लेकिन इस व्रत के नियम बेहद कड़े होते हैं और जरा सी चूक या लापरवाही आपके पूरे व्रत के पुण्य फल को प्रभावित कर सकती है। आइए जानते हैं कि हरतालिका तीज के दिन कौन सी पांच बड़ी गलतियां करने से बचना चाहिए।

हरतालिका तीज व्रत का पौराणिक महत्व और नियम

हरतालिका तीज का व्रत निर्जला और निराहार रहकर किया जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दौरान अन्न और जल दोनों का त्याग करना होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सबसे पहले इस व्रत को माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए वनों में किया था। इस व्रत के दौरान रात्रि जागरण का विशेष महत्व माना गया है। रातभर जागकर भजन-कीर्तन करने और भगवान शिव-पार्वती के मंत्रों का जाप करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, इस पूरे अनुष्ठान के दौरान कुछ खास बातों का विशेष ध्यान रखना बेहद आवश्यक होता है, ताकि व्रत का पूरा फल प्राप्त हो सके।

गलती 1: व्रत के दौरान क्रोध करना या मन में बुरे विचार लाना

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत केवल शरीर से भूखे रहने का नाम नहीं है, बल्कि मन और आत्मा की शुद्धि का भी प्रतीक है। हरतालिका तीज के पवित्र दिन महिलाओं को किसी पर भी गुस्सा करने, अपशब्द बोलने या मन में नकारात्मक विचार लाने से बचना चाहिए। यदि आप व्रत के दौरान किसी से झगड़ा करती हैं या क्लेश करती हैं, तो आपकी पूजा का फल क्षीण हो जाता है। इसलिए इस दिन शांत चित्त रहें, अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें और ईश्वर की आराधना में अपना मन लगाएं।

गलती 2: पूजा की सामग्री या विधि में लापरवाही बरतना

हरतालिका तीज की पूजा में रेत या काली मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाकर उनकी विधिवत पूजा की जाती है। इस दौरान सोलह श्रृंगार की सामग्री, बेलपत्र, शमी पत्र, धतूरा, भांग और फल-फूल अर्पित किए जाते हैं। पूजा की सामग्री में किसी भी प्रकार की कमी या विधि में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। कई बार महिलाएं अज्ञानतावश पूजा के नियमों का पालन ठीक से नहीं करती हैं, जिससे पूजा अधूरी मानी जाती है। इसलिए सभी सामग्रियों को पहले से ही व्यवस्थित कर लें और किसी योग्य पंडित या बुजुर्ग महिला की देखरेख में अनुष्ठान संपन्न करें।

गलती 3: दिन के समय सोना या आलस करना

हरतालिका तीज के व्रत में रात्रि जागरण का विधान है, जिसका अर्थ है कि रातभर जागकर भगवान का स्मरण करना चाहिए। इसके अलावा, कई महिलाएं दिन के समय थकान के कारण सो जाती हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से इस दिन दिन के समय सोना वर्जित माना गया है। दिन में सोने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। इसके बजाय, महिलाओं को भजन-कीर्तन, कथा सुनने और भगवान के ध्यान में अपना समय व्यतीत करना चाहिए ताकि मन एकाग्र रहे।

गलती 4: काले या सफेद वस्त्र धारण करना

सनातन संस्कृति में किसी भी शुभ या व्रत के अवसर पर काले और सफेद रंग के वस्त्र पहनने से बचने की सलाह दी जाती है। इन रंगों को नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। हरतालिका तीज सुहाग का पर्व है, इसलिए इस दिन महिलाओं को लाल, पीले, हरे या गुलाबी जैसे चमकीले और शुभ रंगों के वस्त्र पहनने चाहिए। सोलह श्रृंगार करना इस व्रत का मुख्य अंग है, इसलिए पूरी श्रद्धा के साथ पारंपरिक आभूषण और वस्त्र पहनकर ही पूजा में शामिल हों।

गलती 5: व्रत को बीच में खंडित करना या अन्न-जल ग्रहण करना

यह व्रत बेहद कठोर माना जाता है क्योंकि इसमें अन्न और जल का सेवन वर्जित है। यदि स्वास्थ्य संबंधी कोई गंभीर समस्या न हो, तो निर्जला व्रत ही रखना चाहिए। कभी-कभी महिलाएं थकान या कमजोरी के कारण बीच में ही व्रत तोड़ने का विचार कर लेती हैं या चुपचाप पानी पी लेती हैं। ऐसा करना व्रत के नियमों के विरुद्ध है और इससे व्रत खंडित हो जाता है। यदि कोई महिला गर्भवती है या गंभीर रूप से अस्वस्थ है, तो उसे विशेष नियमों के तहत डॉक्टर की सलाह से ही व्रत करना चाहिए, अन्यथा सामान्य स्थिति में व्रत को बीच में बिल्कुल न छोड़ें।

हरतालिका तीज का यह पर्व महिलाओं के अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है। यदि आप इन पांच महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखते हैं और पूरी निष्ठा के साथ माता पार्वती और भोलेनाथ की पूजा करते हैं, तो आपके जीवन में सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का वास हमेशा बना रहेगा।

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