यूपी में भाजपा से कौन ज्यादा लड़े, इस पर भिड़े पड़े हैं सपाई-कांग्रेसी; इमरान मसूद को इकरा हसन की दो टूक- नुकसान कांग्रेस का ही होगा

उत्तर प्रदेश की सियासत में साल 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) को घेरने के बजाय विपक्षी खेमे के दो सबसे बड़े दल—समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस—आपस में ही दो-दो हाथ करने पर उतारू हो गए हैं। मुख्य तकरार इस बात को लेकर छिड़ी है कि प्रदेश में भाजपा के विजय रथ को रोकने की असली ताकत किसमें है और कौन ज्यादा लड़ेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो कद्दावर मुस्लिम चेहरों—सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और कैराना से सपा सांसद इकरा हसन—के बीच शुरू हुई इस जुबानी जंग ने ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) गठबंधन के भविष्य पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

इमरान मसूद का ‘बंगाल वाला’ अल्टीमेटम: ‘राहुल का हाथ थामें वरना…’

इस पूरे सियासी बवाल की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश विजय संकल्प सम्मेलन’ में हिस्सा लिया और मीडिया से बातचीत में सपा को कड़ा संदेश दिया। इमरान मसूद ने दावा किया कि पूरे देश और उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी का मजबूत माहौल बन चुका है।

इमरान मसूद ने सपा को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर समाजवादी पार्टी को 2027 में भाजपा को सत्ता से बेदखल करना है, तो उसे बिना किसी देरी के राहुल गांधी का हाथ मजबूती से थाम लेना चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा, “अगर सपा ने ऐसा नहीं किया, तो पश्चिम बंगाल जैसा हश्र देखने को मिल सकता है। कोई इस गलतफहमी में न रहे कि वे अकेले दम पर भाजपा को हरा सकते हैं। 2022 में सपा बिना कांग्रेस के 112 सीटों पर ही सिमट गई थी, जबकि 2024 में कांग्रेस का साथ मिला तो 37 सांसद जीतकर आए।” मसूद ने आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए 2017 के गठबंधन से कहीं ज्यादा सीटों की मांग भी ठोक दी।

इकरा हसन का तीखा पलटवार: ‘अखिलेश ही काफी हैं, नुकसान कांग्रेस का होगा’

इमरान मसूद के इस दबाव की राजनीति वाले बयान पर कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने सीधा मोर्चा खोल दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए अपने बयान में इकरा ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी से सीधे मुकाबले की ताकत सिर्फ और सिर्फ अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के पास है।

इकरा हसन ने कहा, “यदि उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस का गठबंधन होता है तो यह अच्छी बात है। लेकिन अगर किसी कारणवश गठबंधन नहीं हो पाता है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को ही उठाना पड़ेगा। कांग्रेस अपने दम पर उत्तर प्रदेश में कुछ भी करने की स्थिति में नहीं है।” इकरा के इस आक्रामक तेवर के बाद दोनों दलों के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच सोशल मीडिया पर खुली जंग छिड़ गई है।

कांग्रेस नेताओं ने याद दिलाई संसद की कुर्सी: ‘यह कांग्रेस की देन है’

इकरा हसन के पलटवार के बाद कांग्रेस के कई अन्य नेता भी इमरान मसूद के बचाव में उतर आए हैं। कांग्रेस नेता सैयद आसिम वकार ने इकरा हसन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “इकरा हसन अभी सियासत में बिल्कुल नई-नई आई हैं और यह संसद में उनका पहला कार्यकाल है। अगली बार जब वे बोलें, तो यह जरूर याद रख लें कि आज उनके पास जो लोकसभा सांसद का पद है, वह कांग्रेस और उसके कार्यकर्ताओं के सहयोग की ही देन है।”

वहीं, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी इमरान मसूद का समर्थन करते हुए कहा कि मसूद ने कोई गलत बात नहीं कही है। समय रहते सीट बंटवारे पर फैसला होना जरूरी है ताकि उम्मीदवारों को जमीन पर तैयारी का पर्याप्त समय मिल सके। इसके अलावा कांग्रेस नेता उदित राज ने भी तंज कसते हुए कहा कि कई बार नेता अपने शीर्ष नेतृत्व को खुश करने के लिए ऐसी बढ़ा-चढ़ाकर बयानबाजी करते हैं।

शिवपाल यादव ने साधी चुप्पी, बड़े नेताओं के पाले में डाली गेंद

इस तकरार के बीच समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने स्थिति को संभालने की कोशिश की है। देवरिया दौरे के दौरान जब उनसे कांग्रेस नेताओं के बयानों और इकरा-इमरान विवाद पर सवाल किया गया, तो शिवपाल ने साफ कहा, “इधर-उधर के लोग क्या बोल रहे हैं, उससे कुछ तय नहीं होता। सीटों के बंटवारे और गठबंधन पर अंतिम फैसला केवल सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ही करेंगे।”

पश्चिमी यूपी की 71 सीटों और मुस्लिम वोटों की रस्साकशी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इकरा हसन और इमरान मसूद के बीच की यह तल्खी सिर्फ गठबंधन की सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम लीडरशिप पर वर्चस्व की लड़ाई है। पश्चिमी यूपी की 71 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का अच्छा-खासा प्रभाव है। सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और बागपत के इलाके में इकरा हसन और इमरान मसूद दोनों ही अपनी-अपनी पार्टियों के बड़े मुस्लिम चेहरे बनकर उभरे हैं।

एक तरफ जहां भाजपा ने अपने सांगठनिक अभियानों के जरिए पश्चिमी यूपी में घेराबंदी शुरू कर दी है, वहीं विपक्षी खेमे में श्रेय लेने और ज्यादा सीटों पर दबाव बनाने का यह खेल ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।

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