
सुरक्षा बलों के काफिले को बनाया गया निशाना
स्थानीय पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह विस्फोट डेरा इस्माइल खान के एक प्रमुख मार्ग और व्यस्त चौराहे के पास उस समय हुआ, जब वहां से फ्रंटियर कोर (FC) और स्थानीय पुलिस का एक साझा काफिला गुजर रहा था।
प्रारंभिक फॉरेंसिक और सुरक्षा जांच में यह बात सामने आई है कि आतंकवादियों ने विस्फोटक से लदी एक मोटरसाइकिल या आईईडी (IED) का इस्तेमाल कर रिमोट अथवा आत्मघाती तरीके से काफिले को निशाना बनाया। धमाका होते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई, चारों तरफ धुएं का घना गुबार छा गया और कई वाहन आग की लपटों में घिर गए। घायलों की चीख-पुकार के बीच स्थानीय नागरिकों और आपातकालीन राहत दलों ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित, कई घायलों की हालत नाजुक
धमाके के तुरंत बाद पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों के दस्तों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से घेरकर सील कर दिया। राहत-बचाव दल ने मलबे से शवों और घायलों को निकालकर तुरंत डेरा इस्माइल खान के डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर (DHQ) अस्पताल और नजदीकी मिलिट्री अस्पताल (CMH) पहुंचाया।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने दोनों अस्पतालों में तुरंत आपातकाल (इमरजेंसी) लागू कर दिया है और छुट्टी पर गए सभी डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ को तत्काल ड्यूटी पर बुला लिया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि 30 से अधिक घायलों में से कम से कम 8 लोगों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है, जिसके चलते मृतकों की संख्या में और इजाफा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
TTP ने ली हमले की जिम्मेदारी, दी और हमलों की धमकी
हमले के कुछ ही घंटों बाद प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने सोशल मीडिया और अपने प्रचार चैनलों के जरिए बयान जारी कर इस विस्फोट की जिम्मेदारी अपने सिर ली। टीटीपी ने दावा किया कि उनके लड़ाकों ने पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों के उस ऑपरेशन के जवाब में यह कार्रवाई की है जो हाल के दिनों में कबाइली इलाकों में चलाए जा रहे थे। संगठन ने धमकी दी है कि आने वाले दिनों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों और पुलिस चौकियों को और बड़े हमलों का निशाना बनाया जाएगा।
खैबर पख्तूनख्वा में बेकाबू होते हालात और सुरक्षा पर सवाल
यह घातक हमला ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान पहले से ही बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा दोनों ही मोर्चों पर सशस्त्र उग्रवाद की दोहरी आग में झुलस रहा है। अगस्त 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से ही पाकिस्तान में टीटीपी के हमलों में कई गुना उछाल दर्ज किया गया है।
इस्लामाबाद लगातार काबुल स्थित अफगान तालिबान सरकार पर आरोप लगाता रहा है कि वह टीटीपी आतंकियों को अपनी जमीन पर पनाह दे रही है, जिसे अफगान हुकूमत खारिज करती आई है। आंतरिक सुरक्षा तंत्र के पूरी तरह चरमराने और आए दिन सुरक्षा बलों के जवानों के मारे जाने से शहबाज शरीफ सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान पर देश भर में तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रांतीय मुख्यमंत्री और संघीय नेतृत्व ने हमले की निंदा करते हुए जांच के आदेश तो दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आतंक के इस खूनी सिलसिले पर लगाम लगाने में पाकिस्तानी हुकूमत पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।
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