
बॉलीवुड के ‘बाबा’ यानी संजय दत्त अक्सर अपनी निजी जिंदगी के उतार-चढ़ाव और अतीत से जुड़े विवादों के चलते सुर्खियों में बने रहते हैं। कई मौकों पर सोशल मीडिया पर उनके पुराने कानूनी मामलों और गलतियों को लेकर ट्रोलर्स उन्हें निशाना बनाने से नहीं चूकते। अब इसी मुद्दे पर हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और राजनेता शेखर सुमन खुलकर संजय दत्त के बचाव में सामने आए हैं। शेखर सुमन ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि किसी भी इंसान को उस बात के लिए बार-बार कटघरे में खड़ा करना बंद होना चाहिए, जिसे वह बहुत पीछे छोड़ चुका है और जिसकी कीमत वह पहले ही पूरी तरह चुका चुका है।
शेखर सुमन का यह बयान उस वक्त आया है जब इंटरनेट पर पुरानी क्लिप्स और गड़े मुर्दे उखाड़कर सेलेब्रिटीज की इमेज को प्रभावित करने का चलन बढ़ गया है। सुमन ने जोर देकर कहा कि संजय दत्त ने अपने जीवन में जो भी गलतियां कीं, उन्हें उन्होंने कभी छुपाने की कोशिश नहीं की। वे एक खुली किताब की तरह रहे, उन्होंने कानून का सामना किया, सजा काटी और फिर समाज के बीच एक मजबूत इंसान बनकर लौटे। ऐसे में बार-बार उनके अतीत को कुरेदना संवेदनहीनता को दर्शाता है।
‘उस बात के लिए मत घेरिए जो खत्म हो चुकी है’: शेखर सुमन का दो-टूक रुख
शेखर सुमन ने संजय दत्त के व्यक्तित्व और उनके संघर्षों पर बात करते हुए कहा कि हर इंसान के जीवन में गलतियां होती हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिनमें अपनी गलतियों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने और उनका प्रायश्चित करने का साहस होता है। सुमन ने कहा कि जब कानून ने उन्हें सजा दी, उन्होंने अदालत के हर आदेश का सम्मान किया और जेल की सजा पूरी की। जब देश की न्याय प्रणाली किसी मामले को सुलझाकर व्यक्ति को एक नया जीवन शुरू करने की अनुमति देती है, तो समाज या सोशल मीडिया के कुछ लोगों को कोई हक नहीं बनता कि वे जज बनकर बैठ जाएं।
सुमन ने आगे कहा कि आज के दौर में इंटरनेट पर बैठे कुछ लोग बिना जमीनी हकीकत जाने किसी की भी पूरी जिंदगी और उसके योगदान को चंद नफरत भरे कमेंट्स में समेटने की कोशिश करते हैं। संजय दत्त ने न केवल अपने विवादों से पार पाया, बल्कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को भी बहादुरी से मात दी। ऐसे जुझारू व्यक्तित्व की सराहना करने के बजाय उन्हें पुरानी बातों पर घेरना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
सुनील दत्त की विरासत और संजय दत्त की बेबाकी की तारीफ
बातचीत के दौरान शेखर सुमन ने संजय दत्त के पिता और भारतीय सिनेमा व राजनीति के दिग्गज स्वर्गीय सुनील दत्त के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि दत्त परिवार ने हमेशा देश, समाज और मानवीय मूल्यों के लिए काम किया है। सुनील दत्त साहब ने जीवन भर लोगों की सेवा की और अपने बेटे को हर मुश्किल दौर में सही राह दिखाने का काम किया।
सुमन के अनुसार, संजय दत्त ने कभी भी खुद को ‘दूध का धुला’ साबित करने के लिए झूठे पीआर (PR) का सहारा नहीं लिया। उन्होंने अपनी बायोग्राफी और फिल्मों के जरिए अपनी हर कमजोरी—चाहे वह नशे की लत रही हो या कानून से जुड़ी मुश्किलें—सब कुछ बेबाकी से दुनिया के सामने रखा ताकि युवा पीढ़ी उनकी गलतियों से सीख ले सके। जब कोई व्यक्ति इतना ईमानदार और पारदर्शी हो, तो उसे सिर्फ नीचा दिखाने के लिए पुराने पन्नों को पलटना बंद किया जाना चाहिए।
फिल्म इंडस्ट्री और फैंस का मिला समर्थन
शेखर सुमन के इस साहसी और स्पष्ट बयान के बाद बॉलीवुड गलियारों और आम फैंस के बीच भी इसकी खूब सराहना हो रही है। सोशल मीडिया पर संजय दत्त के प्रशंसकों ने शेखर सुमन का आभार जताते हुए कहा कि आखिरकार किसी ने इंडस्ट्री में खुलकर सच बोलने की हिम्मत दिखाई है।
वर्कफ्रंट की बात करें तो संजय दत्त आज भी साउथ से लेकर बॉलीवुड तक की बड़ी पैन-इंडिया फिल्मों में अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत रहे हैं। खलनायक से लेकर नायक तक, उनके स्क्रीन प्रेजेंस का आज भी कोई सानी नहीं है। शेखर सुमन की यह अपील एक बार फिर यह संदेश देती है कि सिनेमा के सितारों को भी इंसान समझा जाए और उनके वर्तमान काम तथा जज्बे का सम्मान किया जाए, न कि उनके बीते हुए कल को ढाल बनाकर उन पर पत्थर उछाले जाएं।
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