
ज्योतिषीय गणना : देवों के देव महादेव की आराधना के लिए मासिक शिवरात्रि का दिन बेहद कल्याणकारी माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस बार चैत्र मास की यह पावन तिथि कल यानी 17 मार्च 2026 को पड़ रही है। शिव भक्तों के लिए यह दिन व्रत रखने और मध्य रात्रि में भोलेनाथ की विशेष पूजा करने के लिए सर्वोत्तम है। धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त सच्ची निष्ठा से इस दिन व्रत रखते हैं, महादेव उनके जीवन के सभी संकटों को दूर कर देते हैं।
जानें कब से शुरू हो रही है चतुर्दशी तिथि
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 17 मार्च 2026 की सुबह से हो रही है। शास्त्रों के मुताबिक मासिक शिवरात्रि का पूजन मुख्य रूप से निशिता काल (मध्य रात्रि) में किया जाता है, इसलिए उदया तिथि और अर्धरात्रि के योग के कारण 17 मार्च को ही व्रत और पूजन का विधान श्रेष्ठ माना जा रहा है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त से ही शिवालयों में भक्तों का तांता लगना शुरू हो जाएगा और लोग जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
मासिक शिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि महाशिवरात्रि की तरह ही हर महीने आने वाली शिवरात्रि का व्रत रखने से अविवाहितों को सुयोग्य जीवनसाथी मिलता है और विवाहित लोगों के दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है। चैत्र मास की शिवरात्रि विशेष रूप से नई ऊर्जा और संकल्पों की सिद्धि के लिए फलदायी मानी जाती है। भक्त इस दिन ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए महादेव को बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और गंगाजल अर्पित करते हैं।
कैसे करें महादेव की पूजा?
कल मनाई जाने वाली इस मासिक शिवरात्रि पर पूजा का विशेष फल प्राप्त करने के लिए भक्तों को सुबह जल्दी स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद मंदिर या घर में भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण कर व्रत का संकल्प लें। शिवपुराण के अनुसार, इस दिन प्रदोष काल और निशिता काल में महादेव का रुद्राभिषेक करना अत्यंत शुभ होता है। यदि आप घर पर पूजा कर रहे हैं, तो शिवलिंग पर पंचामृत अर्पित करें और शिव चालीसा का पाठ करें। शाम के समय दीप दान करना भी इस दिन विशेष फल देता है।
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