
ज्योतिष शास्त्र : ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल और उनके संयोग का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इन्हीं संयोगों में से एक है ‘गुरु चांडाल योग’, जिसे ज्योतिष विद्या में बेहद कष्टकारी और अशुभ माना गया है। जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के किसी भी भाव में देवगुरु बृहस्पति और पापी ग्रह राहु की युति होती है, तो इस योग का निर्माण होता है। मान्यता है कि यह योग व्यक्ति की बुद्धि भ्रमित कर देता है और उसकी बनी-बनाई तरक्की पर ब्रेक लगा देता है।
क्या हैं गुरु चांडाल योग के प्रमुख लक्षण?
गुरु चांडाल योग से प्रभावित व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखने लगते हैं। ऐसे व्यक्ति का मन पूजा-पाठ से हटने लगता है और वह अनैतिक कार्यों की ओर आकर्षित होने लगता है। निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है और व्यक्ति अक्सर गलत संगत में पड़कर अपना नुकसान कर बैठता है। यदि आपको महसूस हो रहा है कि आपके बनते हुए काम ऐन वक्त पर बिगड़ रहे हैं या बिना कारण मान-हानि हो रही है, तो यह आपकी कुंडली में गुरु चांडाल योग का संकेत हो सकता है।
करियर और वैवाहिक जीवन पर पड़ता है बुरा असर
करियर के मोर्चे पर यह योग पदोन्नति में बाधा और कार्यस्थल पर विवाद पैदा करता है। व्यक्ति कितनी भी मेहनत कर ले, उसे उचित श्रेय नहीं मिलता। वहीं, वैवाहिक जीवन में भी यह योग जहर घोलने का काम करता है। पति-पत्नी के बीच अविश्वास, छोटी-छोटी बातों पर बड़े झगड़े और सामंजस्य की कमी इस योग के कारण देखी जाती है। गुरु चूंकि सुख और संतान का कारक है, इसलिए राहु के प्रभाव से संतान प्राप्ति में भी अड़चनें आ सकती हैं।
मुक्ति के सरल उपाय और जीवनशैली में बदलाव
ज्योतिषियों के अनुसार, गुरु चांडाल योग के प्रभाव को कम करने के लिए भगवान विष्णु की आराधना सबसे उत्तम है। प्रत्येक गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करना और चने की दाल व पीले वस्त्रों का दान करना लाभकारी होता है। इसके अलावा, राहु की शांति के लिए शिव चालीसा का पाठ और माथे पर चंदन का तिलक लगाना चाहिए। अपनी जीवनशैली में सात्विकता लाएं और बड़ों व गुरुओं का अपमान करने से बचें। गायत्री मंत्र का नियमित जाप भी इस अशुभ योग के नकारात्मक प्रभाव को नष्ट करने में सहायक सिद्ध होता है।
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