नई दिल्ली/दुबई: वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे मजबूत स्तंभ ‘पेट्रो-डॉलर’ की नींव हिलती नजर आ रही है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने वॉशिंगटन को एक ऐसी चेतावनी दी है, जिसने व्हाइट हाउस की नींद उड़ा दी है। यूएई ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उसे संकट के समय अमेरिका से वित्तीय सुरक्षा की गारंटी नहीं मिली, तो वह तेल के व्यापार के लिए अमेरिकी डॉलर को छोड़कर चीनी मुद्रा ‘युआन’ (Yuan) का रुख कर सकता है।
UAE ने मांगी ‘सेफ्टी नेट’ की गारंटी
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, यूएई को डर है कि ईरान के साथ बढ़ते युद्ध के कारण उसकी अर्थव्यवस्था और ग्लोबल फाइनेंशियल हब की छवि को भारी नुकसान हो सकता है। इसी चिंता के मद्देनजर यूएई सेंट्रल बैंक के गवर्नर खालिद मोहम्मद बलामा ने हाल ही में वॉशिंगटन में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के साथ गोपनीय बैठकें कीं। यूएई ने अमेरिका से एक ‘करेंसी-स्वैप लाइन’ (वित्तीय मदद का भरोसा) की मांग की है, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार कम होने की स्थिति में उसकी अर्थव्यवस्था को संभाला जा सके।
डॉलर की जगह अब चीनी युआन में होगा तेल का खेल?
यूएई के अधिकारियों ने अमेरिका को सीधे तौर पर बताया है कि अगर युद्ध की वजह से उनके पास डॉलर की कमी होती है, तो वे चुपचाप नहीं बैठेंगे। तेल की बिक्री और अन्य बड़े अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के लिए वे चीन की मुद्रा युआन या अन्य देशों की मुद्राओं का इस्तेमाल शुरू कर देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यूएई जैसा बड़ा तेल उत्पादक देश डॉलर से नाता तोड़ता है, तो यह वैश्विक बाजार में डॉलर के प्रभुत्व (De-dollarization) के अंत की शुरुआत हो सकती है।
अमेरिका के ‘दोहरे रवैये’ से नाराज है अमीरात
यूएई का मानना है कि अमेरिका ने ईरान पर हमले का फैसला लेने से पहले अपने सहयोगियों के आर्थिक हितों का ख्याल नहीं रखा। इस युद्ध ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को संकट में डाल दिया है। हालांकि, फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा यूएई को ‘स्वैप लाइन’ देने की संभावना कम दिख रही है। आमतौर पर अमेरिका यह सुविधा केवल अपने करीबी वित्तीय भागीदारों जैसे ब्रिटेन, कनाडा और यूरोपीय संघ को ही देता है। यूएई के साथ फिलहाल अमेरिका का ऐसा कोई स्थायी समझौता नहीं है।
क्या खतरे में है अमीरात की अर्थव्यवस्था?
भले ही यूएई के पास 270 अरब डॉलर का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार है और उसका ‘दिरहम’ डॉलर से जुड़ा हुआ है, लेकिन युद्ध के लंबे खिंचने से निवेशकों में डर पैदा हो गया है। S&P ग्लोबल की रिपोर्ट कहती है कि अगर तेल निर्यात के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर हमला होता है, तो यूएई की मजबूत वित्तीय स्थिति को भी गहरा झटका लग सकता है। यही कारण है कि खाड़ी देशों ने हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार से अरबों डॉलर का कर्ज जुटाना शुरू कर दिया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
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