
नई दिल्ली (हेल्थ डेस्क)। सीने में जलन और एसिडिटी होते ही अक्सर लोग ठंडा दूध, नींबू पानी या अदरक की चाय जैसे देसी नुस्खों का सहारा लेते हैं। इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. प्रियम बोरडोलोई के अनुसार, ये घरेलू नुस्खे भले ही तुरंत थोड़ी राहत दें, लेकिन कुछ ही घंटों बाद पेट में स्टमक एसिड के प्रोडक्शन को कई गुना बढ़ा देते हैं, जिससे एसिडिटी की समस्या और अधिक भयावह हो जाती है।
क्यों ठंडा दूध पीना है एसिडिटी का सबसे खराब इलाज?
डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि ठंडा दूध पीना एसिडिटी भगाने का सबसे गलत तरीका है। दूध में भरपूर मात्रा में कैल्शियम और प्रोटीन होता है, जो पेट में गैस्ट्रिन (Gastrin) नामक हार्मोन को ट्रिगर करता है। यह हार्मोन गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम को प्रोटीन पचाने के लिए और अधिक एसिड बनाने का सिग्नल देता है। नतीजतन, एक-दो घंटे बाद ही सीने में दोबारा तेज जलन शुरू हो जाती है।
क्या है गैस्ट्रिन हार्मोन और इसका असर?
गैस्ट्रिन पाचन तंत्र के लिए एक मुख्य हार्मोन है जो पेट की ग्रंथियों को एसिड और डाइजेस्टिव एंजाइम छोड़ने का निर्देश देता है। जब दूध या भारी चीजों से इसका स्तर अचानक बढ़ता है, तो पाचन तंत्र का सामान्य संतुलन बिगड़ जाता है। इससे एसिड रिफ्लक्स (Acid Reflux) और पेट में अल्सर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
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