उत्तर प्रदेश शासन ने राज्य की कानून-व्यवस्था, आगामी परीक्षाओं की शुचिता और विकास कार्यों को रफ्तार देने के लिए अपनी प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह कस दिया है। यूपी के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों (Commissioners), जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की। इस मैराथन बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सख्त लहजे में कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने साफ कहा कि परीक्षा के आयोजन से लेकर आम जनता की शिकायतों के निपटारे तक किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
3.5 लाख अभ्यर्थियों के लिए NEET परीक्षा पर हाई अलर्ट
मुख्य सचिव ने बैठक में सबसे पहला और बड़ा निर्देश ‘नीट’ (NEET) परीक्षा के आयोजन को लेकर दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 59 जनपदों में लगभग 3.5 लाख अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की गाइडलाइंस का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करते हुए परीक्षा को पूरी तरह शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के आदेश दिए गए हैं। सभी परीक्षा केंद्रों पर महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मियों की मुस्तैदी रहेगी। इसके अलावा रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और प्रमुख चौराहों पर अभ्यर्थियों की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए पुलिस बल तैनात रहेगा।
उत्तर प्रदेश 9 क्षेत्रीय औद्योगिक जोनों में विभाजित, लैंड बैंक तैयार करने के आदेश
यूपी को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने एक बेहद बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। प्रदेश में ‘सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र’ विकसित किए जाएंगे। इन क्षेत्रों को सर्वसुविधायुक्त बनाने के लिए पूरे राज्य को 9 क्षेत्रीय जोनों में बांटा गया है:
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जोन 1 व 2: नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, बागपत, मेरठ और सहारनपुर मंडल।
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जोन 3 व 4: मुरादाबाद, बरेली, आगरा और अलीगढ़।
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जोन 5 व 6: लखनऊ, अयोध्या, कानपुर और प्रयागराज।
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जोन 7, 8 व 9: वाराणसी, विंध्याचल, आजमगढ़, झांसी, चित्रकूट, गोरखपुर, बस्ती और देवीपाटन मंडल।
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों में 50 से 100 एकड़ की भूमि चिह्नित कर जल्द से जल्द एमएसएमई (MSME) विभाग को सौंपें, ताकि वहां स्किल डेवलपमेंट सेंटर, औद्योगिक प्लांट और फायर स्टेशन जैसी सुविधाएं तुरंत शुरू की जा सकें।
‘वंदना योजना’ के तहत बुजुर्गों के बनेंगे आयुष्मान कार्ड
बैठक में स्वास्थ्य कल्याण को प्राथमिकता देते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि ‘वय वंदना योजना’ के तहत 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी बुजुर्गों का आयुष्मान कार्ड अनिवार्य रूप से बनाया जाए। ई-केवाईसी (e-KYC) में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए एक विशेष ‘डाटा करेक्शन पोर्टल’ विकसित किया जा रहा है। आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद लेकर छूटे हुए पात्र बुजुर्गों को इस योजना से जोड़ा जाएगा, जिसकी नियमित समीक्षा मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) करेंगे।
अब AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) करेगी जनशिकायतों की निगरानी, लापरवाहों पर गिरेगी गाज
जनता की समस्याओं के समाधान को लेकर मुख्य सचिव बेहद आक्रामक नजर आए। उन्होंने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को तय समय पर जनसुनवाई करने और सभी मामलों को आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर दर्ज करने का आदेश दिया। डीएम को हर दिन कम से कम 10 शिकायतों का रैंडम फीडबैक खुद लेना होगा। यदि जनता का फीडबैक असंतोषजनक मिला, तो संबंधित कर्मचारी पर सीधी गाज गिरेगी। मुख्य सचिव ने एक बड़ी तकनीक की घोषणा करते हुए बताया कि जनशिकायतों की सटीक मॉनिटरिंग के लिए एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रणाली का ट्रायल चल रहा है। जल्द ही इसे आईजीआरएस पोर्टल से जोड़ दिया जाएगा, जो शिकायतों का सारांश (Summary) तैयार कर समाधान के सटीक विकल्प सुझाएगी।
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