चीन और पाकिस्तान के बीच ‘सदाबहार’ रणनीतिक साझेदारी एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया बीजिंग यात्रा के बाद, अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 23 से 26 मई तक चीन के आधिकारिक दौरे पर जा रहे हैं। चीनी प्रधानमंत्री ली क्वियांग के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा न केवल कूटनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय भू-राजनीति पर भी गहरे प्रभाव पड़ सकते हैं।
बैठक का एजेंडा: कूटनीति से सुरक्षा तक
शहबाज शरीफ की बीजिंग यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली क्वियांग के साथ कई अहम विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने इस दौरे को दोनों देशों के बीच संबंधों को ‘नए अध्याय’ के रूप में देखने की कोशिश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर जोर दिया जाएगा:
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रणनीतिक सुरक्षा सहयोग: दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।
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आर्थिक गलियारा (CPEC): चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत जारी परियोजनाओं को गति देने और भविष्य के निवेश पर मुहर लगना तय माना जा रहा है।
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क्षेत्रीय भू-राजनीति: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया चीन दौरे के बाद, बीजिंग अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पाकिस्तान के साथ समन्वय पर जोर दे सकता है।
कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब चीन और पाकिस्तान अपने कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाल ही में पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को संदेश भेजकर दोनों देशों के संबंधों को ‘अटूट’ और ‘आदर्श’ करार दिया है। जिनपिंग का कहना है कि चीन और पाकिस्तान ‘सुख-दुःख के साथी’ हैं, जो आपसी राजनीतिक विश्वास और व्यावहारिक सहयोग के आधार पर मजबूती से खड़े हैं।
चीन-पाकिस्तान की बढ़ती करीबियां क्या संकेत देती हैं?
ट्रंप की चीन यात्रा के बाद शहबाज शरीफ का दौरा यह दर्शाता है कि बीजिंग अपने दक्षिण एशियाई सहयोगी के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ करना चाहता है। ‘शांति और विकास’ का नाम लेने के बावजूद, विश्लेषकों का मानना है कि चीन इस यात्रा का इस्तेमाल क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित करने के लिए कर सकता है। क्या यह यात्रा केवल द्विपक्षीय दोस्ती तक सीमित रहेगी या इसका उद्देश्य वैश्विक मंच पर किसी नए गठबंधन की नींव रखना है? यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
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