जम्मू-कश्मीर की राजनीति में भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर एक बार फिर नई बहस छिड़ गई है। पिता और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला के बाद अब मौजूदा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (CM Omar Abdullah) ने भी पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने और द्विपक्षीय बातचीत दोबारा शुरू करने की पुरजोर वकालत की है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेता उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर दोनों देशों के बीच अमन-चैन के लिए बातचीत का रास्ता साफ होता है, तो इस पर किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
पीएम मोदी और शहबाज शरीफ को लिखे ‘खुले खत’ पर मचा बवाल
दरअसल, हाल ही में भारत और पाकिस्तान के करीब 100 से अधिक बुद्धिजीवियों, पूर्व राजनयिकों और वरिष्ठ नागरिकों ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों— पीएम नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ को एक संयुक्त खुला खत लिखा था। इस पत्र में दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने और बातचीत शुरू करने की अपील की गई थी। इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी शामिल थीं, जिसके बाद विपक्षी दलों और आलोचकों ने फारुख अब्दुल्ला को आड़े हाथ लिया था।
‘जब RSS बातचीत की बात करता है, तब कोई आपत्ति नहीं होती’
अपने पिता की हो रही तीखी आलोचना पर बचाव करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का उदाहरण दिया। उमर ने कहा, > “यह टकराव कोई नया नहीं, बल्कि 30 से 40 साल पुराना है। पिछले साल कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद तनाव और बढ़ गया है। लेकिन हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक बेहद वरिष्ठ नेता ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि भारत और पाकिस्तान को आपस में बैठकर बात करनी चाहिए। हैरान करने वाली बात यह है कि जब संघ का कोई बड़ा नेता यह बात कहता है तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन जैसे ही जम्मू-कश्मीर का कोई राजनेता शांति और बातचीत की वकालत करता है, तो उसे देश में एक बहुत बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया जाता है।”
अटल बिहारी वाजपेयी का दिया उदाहरण: ‘दोस्त बदल सकते हैं, पड़ोसी नहीं’
उमर अब्दुल्ला ने भारत के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि देश के तमाम पूर्व प्रधानमंत्रियों ने हमेशा पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंधों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के ऐतिहासिक बयान को दोहराते हुए कहा, “हम आज भी वही बात कह रहे हैं जो कभी श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कही थी कि— ‘हम अपने दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन अपने पड़ोसी नहीं बदल सकते।’ चूंकि पाकिस्तान हमारा पड़ोसी है, इसलिए हम बस यही चाहते हैं कि दोनों पड़ोसियों के बीच रिश्ते सामान्य और बेहतर हों।”
‘सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ की पहल पर लिखा गया था पत्र
आपको बता दें कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को यह पत्र ‘सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ नामक सामाजिक संगठन के चेयरमैन ओपी शाह की विशेष पहल पर भेजा गया था। शांति बहाली के उद्देश्य से लिखे गए इस खत पर भारत और पाकिस्तान की कई दिग्गज हस्तियों ने दस्तखत किए हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर के नेताओं के अलावा भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ के पूर्व चीफ ए.एस. दुलत, राज्यसभा सांसद मनोज झा, पूर्व राजदूत अशरफ जहांगीर काजी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर समेत कई अन्य गणमान्य नागरिक शामिल हैं।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया