वाराणसी: “भारत हमेशा से एक कृषि प्रधान देश रहा है और यहां की पूरी अर्थव्यवस्था खेती-बाड़ी से जुड़ी हुई थी। पुराने समय में हमारा किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि एक बड़ा इनोवेटर (नवाचारी) था, जो नए-नए प्रयोगों से भूमि की उत्पादकता बढ़ाता था। यही वजह है कि भारत में खेती कभी भी घाटे का सौदा नहीं रही।” यह बातें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में कहीं।
अपने दो दिवसीय वाराणसी दौरे के दूसरे दिन सीएम योगी BHU में ‘विज्ञान भारती’ के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। मंच से बोलते हुए उन्होंने देश की प्राचीन अर्थव्यवस्था, विज्ञान के महत्व और पर्यावरण चेतना पर खुलकर बात की।
जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी थी 45 फीसदी
समारोह को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने भारत के गौरवशाली इतिहास और आर्थिक महाशक्ति होने के आंकड़ों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि विज्ञान का असली और एकमात्र मतलब ‘लोक कल्याण’ होना चाहिए। दुनिया के जिस भी देश ने तरक्की की है, उसने विज्ञान को जनकल्याण से जोड़ा है।
सीएम योगी ने कहा:
“आधुनिक विज्ञान का इतिहास महज 400 से 500 साल पुराना माना जाता है। लेकिन अगर हम भारत की प्राचीन और समृद्ध परंपरा का अध्ययन करें, तो ज्ञात होता है कि कभी वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 से 45 प्रतिशत हुआ करती थी। लगभग 400 साल पहले भी हम दुनिया की अर्थव्यवस्था में 24-25 फीसदी का योगदान दे रहे थे। लेकिन आजादी के समय हम सिमटकर महज 1.5 से 2 प्रतिशत पर आ गए। हमें आत्ममंथन करना होगा कि आखिर ऐसा क्यों और कैसे हुआ।”
जगदीश चंद्र बसु की कहानी और मां के हाथ का पौधारोपण
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में पर्यावरण और पौधों में जीवन के महत्व पर विशेष जोर दिया। महान भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु की प्रसिद्ध ‘दो पौधों वाली कहानी’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चेतना सिर्फ मनुष्यों या जीवों में ही नहीं होती, बल्कि जड़ और पेड़-पौधों में भी होती है।
इस दौरान सीएम योगी भावुक भी नजर आए। उन्होंने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे उनकी मां खुद अपने हाथों से पौधे लगाया करती थीं और उनकी देखभाल करती थीं। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि ज्ञान और अच्छे विचार जहां से भी आएं, उनका खुले दिल से स्वागत किया जाना चाहिए और पर्यावरण संरक्षण के लिए हर व्यक्ति को पौधारोपण जरूर करना चाहिए।
2014 से पहले बदहाल थे कारीगर, ODOP ने बदली तस्वीर
पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश के पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों को पूरी तरह बदहाल छोड़ दिया गया था। उनके हुनर और उत्पादों को बेकार बताकर उन्हें बाजारों से बाहर कर दिया गया, जिससे हमारी सबसे बड़ी ताकत ‘MSME’ और ‘कृषि क्षेत्र’ कमजोर हो गया।
उन्होंने कहा, “2017 में उत्तर प्रदेश में हमारी सरकार आने के बाद हमने ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP – एक जिला एक उत्पाद) योजना की शुरुआत की। हमने कारीगरों के उत्पादों की बेहतरीन डिजाइनिंग और पैकेजिंग पर काम किया और उन्हें आधुनिक बाजार से जोड़ा। आज यही कारीगर आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ बन रहे हैं।”
₹150 करोड़ के ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ का औचक निरीक्षण
विज्ञान भारती के कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीधे काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS-BHU) पहुंचे। वहां उन्होंने बुजुर्गों की बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बन रहे ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ का स्थलीय निरीक्षण किया।
लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह सेंटर 7 मंजिला अत्याधुनिक अस्पताल होगा, जिसमें बुजुर्गों के लिए 200 बेड की विशेष व्यवस्था होगी। सीएम योगी ने मौके पर मौजूद कार्यदायी संस्था के इंजीनियरों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि काम को युद्धस्तर पर चलाकर, गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए समय सीमा से पहले पूरा किया जाए।
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