‘अब लौटकर न आने वाले’: अखिलेश यादव का योगी सरकार पर तीखा प्रहार, कविता के जरिए गिनाईं सरकार की विफलताएं

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक तीखी कविता पोस्ट कर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। अपनी इस कविता के माध्यम से उन्होंने प्रशासनिक कार्यशैली और जनविरोधी नीतियों के आरोपों की एक लंबी फेहरिस्त पेश की है।

अखिलेश की कविता में उठाए गए प्रमुख मुद्दे:

सपा मुखिया ने सरकार को घेरने के लिए विभिन्न सामाजिक और प्रशासनिक वर्गों से जुड़े मुद्दों को कविता में पिरोया है:

  • दमनकारी नीतियां: उन्होंने ‘बुलडोजर कार्रवाई’ और ‘झूठे मुकदमे’ दर्ज कराने के आरोपों के जरिए सरकार पर आतंक फैलाने का आरोप लगाया।

  • विभिन्न वर्ग: अपनी कविता में उन्होंने शिक्षकों से ‘भूसा दान’ जुटाने, शिक्षामित्रों के मानदेय का मुद्दा, और आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की समस्याओं का जिक्र किया।

  • सामाजिक न्याय: उन्होंने आरक्षण व्यवस्था में कटौती और पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग पर अत्याचार के गंभीर आरोप लगाए।

  • कानून-व्यवस्था और प्रेस: अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज और पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार का उल्लेख करते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन की बात कही।

  • बुनियादी सुविधाएं: उन्होंने बिजली-पानी की किल्लत और जनता को केवल ‘झूठे आश्वासन’ देने का आरोप लगाया।

सियासी संदेश: ‘अब हैं जाने वाले’

अखिलेश यादव की कविता की अंतिम पंक्तियां—‘अब हैं जानेवाले, लौटकर न आनेवाले’—सबसे अधिक चर्चा का विषय बनी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे आगामी चुनावों के मद्देनजर सपा के एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने इस हमले के जरिए यह जताने की कोशिश की है कि उत्तर प्रदेश की जनता अब मौजूदा सरकार से पूरी तरह निराश हो चुकी है और बदलाव का मन बना चुकी है।

विपक्ष और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया:

सपा प्रमुख की इस पोस्ट पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। जहां सपा कार्यकर्ता इसे जनआवाज बता रहे हैं, वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने भी पलटवार किया है। हाल ही में हमीरपुर पुल हादसे को लेकर भी अखिलेश यादव ने सरकार की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उसे ‘हवा में टूटने वाला पुल’ करार दिया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव की यह कविता केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह आगामी 2027 विधानसभा चुनावों के लिए उनकी उस चुनावी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वे जनता के रोजमर्रा के संघर्षों को सरकार की ‘विदाई’ के मुख्य कारणों के रूप में पेश कर रहे हैं।

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