‘दो नावों पर पैर नहीं रख सकता अमेरिका’, यूरोपीय संघ के मंत्री ने खोली पोल; यूक्रेन और खाड़ी जंग के बीच फंसा सुपरपावर

ब्रुसेल्स/वॉशिंगटन। ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण महायुद्ध ने न केवल मिडिल ईस्ट, बल्कि पश्चिमी देशों के सैन्य समीकरणों को भी हिलाकर रख दिया है। अब तक खुद को दुनिया का ‘रक्षक’ बताने वाले अमेरिका की पोल किसी और ने नहीं, बल्कि उसके सहयोगी यूरोपीय संघ (EU) ने ही खोल दी है। यूरोपीय संघ के रक्षा और अंतरिक्ष आयुक्त अंद्रियस कुबिलियस ने एक सनसनीखेज बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका अब इस स्थिति में नहीं है कि वह एक साथ यूक्रेन और खाड़ी देशों (Gulf Countries) को मिसाइलों की सप्लाई कर सके। कुबिलियस के इस बयान ने वॉशिंगटन की सैन्य क्षमताओं और वैश्विक प्रभाव पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

मिसाइलों का काल: अमेरिका के पास खत्म हो रहा है घातक हथियारों का भंडार

वर्साय में आयोजित एक महत्वपूर्ण सम्मेलन के दौरान कुबिलियस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान संकट ने यूरोप के लिए ‘वेक-अप कॉल’ का काम किया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी रक्षा उद्योग अब मिसाइलों और एंटी-बैलिस्टिक प्रणालियों की बढ़ती मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं है। कुबिलियस ने चेतावनी दी कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो अमेरिका को या तो यूक्रेन की मदद रोकनी होगी या फिर खाड़ी क्षेत्र में अपने सहयोगियों को उनके हाल पर छोड़ना होगा। पेंटागन की रिपोर्ट्स भी इशारा कर रही हैं कि टॉमहॉक (Tomahawk) और SM-3 इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक खतरनाक स्तर तक नीचे गिर चुका है।

यूक्रेन बनाम खाड़ी: राष्ट्रपति जेलेंस्की की चिंता और ‘पैट्रियट’ की शर्त

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने भी इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। जेलेंस्की का मानना है कि ईरान के साथ अमेरिका की सीधी जंग का सीधा असर यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य सहायता पर पड़ेगा। हालांकि, यूक्रेन ने एक अनोखा प्रस्ताव देते हुए कहा है कि वे अमेरिका को अपनी वह ‘सस्ती ड्रोन रोधी तकनीक’ देने को तैयार हैं, जो ईरानी ‘सहीद’ (Shahed) ड्रोन्स को मार गिराने में माहिर है। लेकिन इसके बदले में यूक्रेन ने अमेरिका से ‘पैट्रियट’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मांग की है, जिसकी सप्लाई करना फिलहाल वॉशिंगटन के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

यूरोप को अब ‘आत्मनिर्भर’ होने की जरूरत, ड्रोन्स ने बढ़ाई मुसीबत

अंद्रियस कुबिलियस ने इस संकट के बीच यूरोप की अपनी रक्षा प्रणाली बनाने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका पर निर्भरता अब यूरोप के लिए जोखिम भरी साबित हो रही है। खाड़ी क्षेत्र में ईरान द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे आत्मघाती ड्रोन्स ने अमेरिकी बेस और होर्मुज स्ट्रेट में तैनात जहाजों को भारी नुकसान पहुँचाया है। इन ड्रोन्स को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मिसाइलें न केवल महंगी हैं, बल्कि अब उनकी कमी भी महसूस होने लगी है। कुबिलियस का यह बयान दर्शाता है कि आने वाले समय में वैश्विक सुरक्षा का ढांचा पूरी तरह बदलने वाला है।

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