पाकिस्तान के F-16 बेड़े को ‘सुपरपावर’ बना रहा अमेरिका: 488 मिलियन डॉलर के नए रडार कॉन्ट्रैक्ट का ऐलान

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: दक्षिण एशिया की भू-राजनीति के बीच एक बड़ी रक्षा खबर सामने आई है। अमेरिकी वायु सेना ने अपने लड़ाकू विमान F-16 के रडार सिस्टम को अपग्रेड करने और तकनीकी सहयोग देने के लिए 488 मिलियन डॉलर (करीब 4,000 करोड़ रुपये) के एक विशाल कॉन्ट्रैक्ट की घोषणा की है। इस डील की सबसे अहम बात यह है कि इसमें पाकिस्तान को भी शामिल किया गया है, जिससे पाकिस्तानी वायु सेना (PAF) के बेड़े की ताकत और उम्र दोनों में इजाफा होगा।


रक्षा डील की 5 बड़ी बातें:

  • रडार अपग्रेड: इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत F-16 में लगे ‘APG-66’ और ‘APG-68’ रडार सिस्टम को एडवांस इंजीनियरिंग सपोर्ट दिया जाएगा। यह रडार दुश्मन के विमानों को लंबी दूरी से पहचानने और निशाना बनाने में सक्षम है।

  • नॉर्थरोप ग्रुम्मन को ठेका: अमेरिकी रक्षा दिग्गज नॉर्थरोप ग्रुम्मन सिस्टम्स कॉर्पोरेशन को इस काम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • लंबी अवधि का प्लान: यह अपग्रेड कार्यक्रम 31 मार्च, 2036 तक चलेगा, जिसका मतलब है कि अगले एक दशक से ज्यादा समय तक अमेरिका पाकिस्तान के जेट्स की देखभाल करेगा।

  • 2040 तक बढ़ी उम्र: इस आधुनिकीकरण के बाद पाकिस्तान के पुराने हो रहे F-16 विमान अब 2040 तक उड़ान भरने और युद्ध अभियानों में हिस्सा लेने के काबिल बने रहेंगे।

  • ग्लोबल पार्टनरशिप: पाकिस्तान के अलावा इस डील में इजरायल, तुर्किए, दक्षिण कोरिया, पोलैंड और ग्रीस जैसे 20 से ज्यादा अमेरिकी सहयोगी देश भी शामिल हैं।


पाकिस्तान के लिए क्यों खास है यह ‘अपग्रेड’?

दिसंबर 2025 में भी अमेरिका ने पाकिस्तान के लिए 686 मिलियन डॉलर के एक अलग पैकेज को मंजूरी दी थी। इन दोनों पैकेजों को मिलाकर पाकिस्तान के F-16 बेड़े में निम्नलिखित बदलाव होंगे:

  1. लिंक-16 सिस्टम: इससे पाकिस्तानी विमान अन्य मित्र देशों के विमानों के साथ रीयल-टाइम डेटा साझा कर सकेंगे।

  2. सुरक्षित संचार: नए क्रिप्टोग्राफिक उपकरणों और एवियोनिक्स अपग्रेड से विमान के संचार को हैक करना या जाम करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।

  3. आतंकवाद रोधी अभियान: अमेरिका का तर्क है कि इस अपग्रेड से पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ अभियानों में मदद मिलेगी और अमेरिकी बलों के साथ उसका तालमेल (Interoperability) बेहतर होगा।


क्या इससे भारत की चिंता बढ़ेगी?

अमेरिका ने साफ किया है कि इस रक्षा सहयोग का उद्देश्य क्षेत्र के सैन्य संतुलन को बदलना नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की रक्षा क्षमताओं को बनाए रखना है। हालांकि, भारतीय रणनीतिकारों की नजर हमेशा इन अपग्रेड्स पर रहती है, क्योंकि F-16 पाकिस्तान का सबसे विश्वसनीय और आक्रामक लड़ाकू विमान है। हाल के वर्षों में पाकिस्तान ने चीन से J-10C जैसे विमान भी खरीदे हैं, लेकिन F-16 आज भी उसकी वायु सेना की रीढ़ बना हुआ है।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी वायु सेना ने इस अमेरिकी कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि ‘लॉकहीड मार्टिन’ और ‘नॉर्थरोप ग्रुम्मन’ जैसी कंपनियों के सहयोग से उनके बेड़े की तकनीकी क्षमता वैश्विक मानकों के अनुरूप बनी रहेगी।

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