पछता रहा है अमेरिका! यूक्रेन की ‘ड्रोन रोधी तकनीक’ को ठुकराना पड़ी महंगी भूल, ईरान के शाहेद ने ढाया कहर

वॉशिंगटन/कीव। ईरान-अमेरिका युद्ध के भीषण दौर के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारी अब निजी तौर पर यह स्वीकार कर रहे हैं कि यूक्रेन के उस प्रस्ताव को नजरअंदाज करना वॉशिंगटन की सबसे बड़ी सामरिक गलती थी, जिसमें कीव ने महीनों पहले ईरानी ड्रोनों से निपटने का अचूक तरीका बताया था। आज जब ईरान के कम लागत वाले ‘शाहेद’ ड्रोनों ने अमेरिकी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया है, तब जाकर बाइडन प्रशासन को यूक्रेन की ‘वॉर-टेस्टेड’ तकनीक की याद आई है।

7 महीने पहले दी थी चेतावनी: ट्रंप प्रशासन ने किया था इग्नोर

रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग सात महीने पहले यूक्रेन के वरिष्ठ अधिकारियों ने अमेरिका को एक विस्तृत ब्रीफिंग दी थी। इसमें यूक्रेन ने रूसी आक्रमण के दौरान ईरानी ड्रोनों को मार गिराने के अपने अनुभवों और तकनीक को साझा करने का प्रस्ताव रखा था।

  • सामरिक चूक: कीव ने स्पष्ट किया था कि मध्य-पूर्व में संघर्ष की स्थिति में ये ड्रोन अमेरिकी सैनिकों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनेंगे।

  • अस्वीकार करने का रहस्य: उस समय अमेरिकी प्रशासन ने इस प्रस्ताव को क्यों ठुकराया, इसके कारण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन आज वही शाहेद ड्रोन अमेरिका के लिए काल बन गए हैं।

शाहेद ड्रोन का कहर: 7 सैनिकों की मौत और करोड़ों का नुकसान

ईरान के शाहेद ड्रोनों ने अपनी प्रभावशीलता साबित कर दी है। इन ड्रोनों के हमलों में अब तक 7 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है।

  • आर्थिक चोट: इन सस्ते ड्रोनों को रोकने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों को अपने महंगे डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे अब तक लाखों डॉलर का नुकसान हो चुका है।

  • रणनीतिक बदलाव: पिछले हफ्ते, जब ड्रोन हमले अनुमान से कहीं ज्यादा व्यापक हो गए, तब वॉशिंगटन ने अपना रुख बदलते हुए यूक्रेन से तकनीकी मदद मांगी है।

जेलेंस्की की दो टूक: “जो हमारी मदद करेगा, हम उसे बचाएंगे”

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बुधवार को पुष्टि की कि अमेरिका और कई खाड़ी देश (यूएई, कतर, बहरीन, जॉर्डन और कुवैत) अब ईरानी ड्रोनों का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन की विशेषज्ञता चाहते हैं। हालांकि, जेलेंस्की ने इसके लिए सख्त शर्तें भी रखी हैं:

  1. सुरक्षा से समझौता नहीं: यूक्रेन अपनी तकनीक तभी साझा करेगा जब उसकी खुद की सुरक्षा कमजोर न हो।

  2. रूस के खिलाफ समर्थन: जेलेंस्की ने साफ कहा कि वे उन्हीं की मदद करेंगे जो रूस के साथ युद्ध को न्यायपूर्ण तरीके से खत्म करने में यूक्रेन का साथ देंगे।

बदल गया युद्ध का फोकस

जेलेंस्की ने अफसोस जताते हुए यह भी कहा कि ईरान-अमेरिका युद्ध ने पूरी दुनिया का ध्यान यूक्रेन-रूस संघर्ष से हटा दिया है। इसी कारण अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच होने वाली महत्वपूर्ण वार्ता के नए दौर को भी स्थगित करना पड़ा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका यूक्रेन की शर्तों को मानकर इस नई मुसीबत से निपटने के लिए हाथ मिलाता है या नहीं।

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