नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक कूटनीति की बिसात एक बार फिर गरमा गई है। अमेरिका ने रूसी और ईरानी तेल खरीद पर भारत को दी गई 30 दिनों की विशेष छूट (Sanction Waiver) को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। 11 अप्रैल को यह छूट समाप्त होने के बाद अब भारत के सामने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की चुनौती है। हालांकि, भारत सरकार ने इसके लिए पहले से ही एक ‘तगड़ा और रणनीतिक’ प्लान तैयार कर रखा है, जिससे देश में तेल की किल्लत नहीं होने दी जाएगी।
अमेरिका का सख्त रुख: नहीं मिलेगी और छूट
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ कर दिया है कि रूस और ईरान पर लगे प्रतिबंधों के बीच अब सामान्य लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। 5 मार्च को भारत को दी गई राहत अब खत्म हो चुकी है। अमेरिका का तर्क है कि वह रूसी तेल के जरिए मिलने वाले राजस्व को सीमित करना चाहता है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच बड़े व्यापारिक समझौतों पर बातचीत चल रही है।
रूस का वादा: ‘जितना मांगोगे, उतना तेल देंगे’
अमेरिकी पाबंदियों के बावजूद रूस ने भारत के प्रति अपनी दोस्ती दोहराई है। भारत में रूस के राजनयिक डेनिस अलिपोव ने स्पष्ट कहा है कि वैश्विक हालात चाहे जो भी हों, रूस भारत को कच्चा तेल और एलपीजी (LPG) की निर्बाध सप्लाई के लिए तैयार है। उन्होंने रूसी एजेंसी ‘तास’ से बातचीत में जोर दिया कि भारत को जितनी मात्रा में तेल की जरूरत होगी, रूस उतनी आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
भारत का ‘मास्टर प्लान’: 27 से बढ़कर 41 हुए सप्लायर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में पहले ही संकेत दे दिए थे कि भारत किसी एक देश पर अपनी निर्भरता खत्म कर रहा है। पिछले 11 वर्षों में भारत ने अपनी ऊर्जा आयात नीति का विविधीकरण (Diversification) किया है।
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सप्लायरों की संख्या: पहले भारत केवल 27 देशों से तेल आयात करता था, जो अब बढ़कर 41 देश हो गए हैं।
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नए ठिकानों की तलाश: भारत अब खाड़ी देशों से आगे बढ़कर लैटिन अमेरिकी देशों—ब्राजील, कोलंबिया और इक्वाडोर का रुख कर रहा है।
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उभरता सितारा: गुयाना भी भारत के लिए एक बड़े तेल निर्यातक के रूप में उभर रहा है।
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अमेरिकी तेल: भारतीय कंपनियां अब अमेरिका से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने पर विचार कर रही हैं।
सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया है कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि वैश्विक संकट के बावजूद तेल और उर्वरक से भरे जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचें। सरकार का मुख्य लक्ष्य ‘ऊर्जा सुरक्षा’ है, जिसके तहत पीएनजी (PNG) और घरेलू रसोई गैस उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि बाहरी देशों पर निर्भरता कम से कम की जा सके। रणनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत का यह ‘मल्टी-कंट्री’ इंपोर्ट प्लान उसे किसी भी देश के दबाव से मुक्त रखेगा।
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