ईरान में फेल हुआ अमेरिकी मिशन? खामेनेई के बेटे मुजतबा को जनता ने माना ‘सुप्रीम लीडर’, खुफिया रिपोर्ट ने उड़ाई वॉशिंगटन की नींद

तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे चौतरफा हमलों के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (CIA) ने यह स्वीकार कर लिया है कि ईरान में ‘तख्तापलट’ और ‘लोकतंत्र बहाली’ की उनकी योजना फिलहाल नाकाम साबित हुई है। शीर्ष नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बावजूद, उनके बेटे मुजतबा खामेनेई के नेतृत्व वाली नई सरकार को जनता का भारी समर्थन मिल रहा है।

अमेरिकी इंटेलिजेंस का कबूलनामा: नहीं गिरेगी ईरान सरकार

रॉयटर्स के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, तीन अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने पुष्टि की है कि ईरान की सत्ता पर वर्तमान नेतृत्व की पकड़ बेहद मजबूत है। अमेरिका को उम्मीद थी कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान में गृहयुद्ध छिड़ेगा और लोग सड़कों पर उतर आएंगे, जिससे निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के लिए रास्ता साफ होगा। लेकिन इसके उलट, ईरानी जनता ने मुजतबा खामेनेई को अपना नया रहनुमा स्वीकार कर लिया है।

खामेनेई का जनाजा और सीजफायर की शर्त

जंग के पहले ही दिन अयातुल्ला खामेनेई की मौत हो गई थी, लेकिन 13 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक उनका अंतिम संस्कार नहीं किया गया है।

  • रणनीतिक देरी: ईरानी नेतृत्व को डर है कि जनाजे में उमड़ने वाली करोड़ों की भीड़ पर अमेरिका या इजरायल बड़ा हमला कर सकते हैं।

  • शर्त: माना जा रहा है कि सीजफायर (युद्धविराम) होने के बाद ही खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। यह देरी भी जनता के बीच भावनात्मक एकजुटता पैदा कर रही है।

“जंग हमने शुरू नहीं की, पर खत्म हम ही करेंगे”

ईरान की नई लीडरशिप का रुख बेहद आक्रामक है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि भले ही अमेरिका ने हमला शुरू किया हो, लेकिन युद्ध के अंत की शर्तें ईरान ही तय करेगा। वैश्विक स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतों और गैस की किल्लत ने अमेरिका पर भी दबाव बना दिया है, जिसके कारण वॉशिंगटन अब जल्द से जल्द युद्ध खत्म करने के रास्ते तलाश रहा है।

क्यों लगा अमेरिका को बड़ा झटका?

अमेरिका की रणनीति हमेशा से ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) की रही है। खामेनेई के बेटे मुजतबा का जनता द्वारा स्वीकार किया जाना अमेरिका के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है। मुजतबा खुद भी इस वक्त खतरे में हैं और गुप्त ठिकानों से कमान संभाल रहे हैं, फिर भी ईरानी सुरक्षा बल और आम नागरिक उनके पीछे मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं। इस स्थिति ने इजरायल और अमेरिका के ‘मिशन ईरान’ पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

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