
नई दिल्ली। दो अलग-अलग देशों के माता-पिता के बीच चल रहे कड़वे पारिवारिक विवाद और बच्चों की कस्टडी की कानूनी लड़ाई में अदालत ने एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वर्तमान परिस्थितियों में बच्चों का हित सर्वोपरि है। पीठ ने मामले की गंभीरता को समझते हुए स्पष्ट किया कि नाबालिग बच्चे पिछले एक साल से दिल्ली में अपनी जैविक मां के साथ रह रहे हैं और वहां उनकी देखभाल और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं।
दो देशों की सरहदों में उलझा पारिवारिक विवाद
अदालत के समक्ष आया यह मामला किसी एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो अलग-अलग देशों के नागरिकों के बीच उपजा एक जटिल पारिवारिक कलह है। वैवाहिक मतभेदों के कारण बच्चों के भविष्य और उनकी कस्टडी को लेकर माता-पिता के बीच लंबी कानूनी प्रक्रिया चल रही है। अदालत ने माना कि विदेशी धरती और भारतीय परिवेश के बीच फंसे इन बच्चों के लिए स्थिरता सबसे ज्यादा जरूरी है। पिता की दलीलों और मां के साथ रह रहे बच्चों की स्थिति का आकलन करने के बाद पीठ ने पाया कि बच्चे फिलहाल एक सुरक्षित माहौल में हैं।
नामी स्कूल में पढ़ाई और बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि
सुनवाई के दौरान अदालत ने बच्चों की शिक्षा और उनके रहन-सहन पर विशेष गौर किया। पीठ ने उल्लेख किया कि बच्चे दिल्ली के एक प्रतिष्ठित और नामी स्कूल में अपनी पढ़ाई जारी रख रहे हैं। अदालत ने कहा कि बच्चों का शैक्षिक भविष्य और उनकी मानसिक शांति हमारे लिए प्राथमिकता है। चूंकि बच्चे अपनी मां के साथ हैं और उन्हें बेहतरीन शिक्षा मिल रही है, इसलिए कोर्ट ने उनकी वर्तमान स्थिति को संतोषजनक माना। अदालत ने साफ किया कि यह मसला केवल कानूनी दांव-पेंच का नहीं, बल्कि बच्चों के भावनात्मक जुड़ाव और उनकी सुरक्षा का है।
अदालत ने माना मां के पास सुरक्षित है भविष्य
अदालत ने अपने रुख से यह संकेत दिया कि मां का सानिध्य और एक स्थिर वातावरण बच्चों के विकास के लिए इस समय सबसे उपयुक्त है। पिछले एक साल से दिल्ली के परिवेश में ढल चुके बच्चों को अचानक किसी बदलाव में डालना उनके हित में नहीं होगा। पीठ ने पारिवारिक विवाद की बारीकियों को समझते हुए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि माता-पिता की इस खींचतान का असर मासूमों की पढ़ाई और उनके बचपन पर न पड़े। अब इस मामले की अगली सुनवाई में अन्य कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
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