स्वतंत्रता दिवस पर 1057 जांबाजों को वीरता और सेवा पदक का ऐलान, पैरामिलिट्री फोर्सेज में फिर बजा CRPF का डंका; वामपंथी उग्रवाद और आतंकियों के खिलाफ अदम्य साहस के लिए मिले सबसे ज्यादा मेडल

देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश की सीमाओं, आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की रक्षा में अपने अदम्य साहस का परिचय देने वाले जांबाजों के नामों का ऐलान कर दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, इस वर्ष पुलिस, अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा व होमगार्ड तथा सुधारात्मक सेवाओं (जेल प्रशासन) के कुल 1,057 वीर कर्मियों को वीरता और विशिष्ट सेवा पदकों से अलंकृत करने की घोषणा की गई है। इन पदकों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) यानी पैरामिलिट्री फोर्सेज के बीच एक बार फिर देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल ‘केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल’ (CRPF) ने अपनी वीरता और कर्तव्यनिष्ठा का लोहा मनवाते हुए सबसे अधिक पदक अपने नाम किए हैं। चाहे छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में नक्सलियों का खात्मा करना हो या फिर जम्मू-कश्मीर की घाटियों में विदेशी आतंकियों के नापाक मंसूबों को नाकाम करना हो, सीआरपीएफ के जवानों ने हर मोर्चे पर सर्वोच्च बलिदान और पराक्रम का परिचय दिया है।

1057 कर्मियों को मिले पदक: वीरता, विशिष्ट और सराहनीय सेवा का सम्मान

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, इस वर्ष घोषित कुल 1,057 पदकों को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

  • वीरता पदक (Medal for Gallantry – GM): देश भर में जीवन और संपत्ति की रक्षा करने, अपराधियों व आतंकवादियों से लोहा लेने में असाधारण बहादुरी दिखाने वाले कुल 301 कर्मियों को ‘वीरता पदक’ से सम्मानित किया गया है। इनमें 272 पुलिसकर्मी और 29 फायर सर्विस के जांबाज शामिल हैं।

  • विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक (President’s Medal for Distinguished Service – PSM): सुरक्षा बलों में लंबे समय तक उत्कृष्ट, बेदाग और असाधारण सेवा रिकॉर्ड बनाए रखने वाले 92 अधिकारियों व कर्मियों को राष्ट्रपति पदक प्रदान किया जाएगा। इनमें 83 पुलिस सेवा, 4 अग्निशमन सेवा, 3 सिविल डिफेंस व होमगार्ड और 2 सुधारात्मक सेवा के कर्मी हैं।

  • सराहनीय सेवा पदक (Medal for Meritorious Service – MSM): कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा, सूझ-बूझ और उल्लेखनीय सेवा के लिए 664 कर्मियों को यह सम्मान दिया गया है। इसमें 606 पुलिस, 28 फायर सर्विस, 18 सिविल डिफेंस और 12 जेल सेवा कर्मी शामिल हैं।

पैरामिलिट्री में फिर लहराया CRPF का परचम: सर्वाधिक मेडल अपनी झोली में डाले

देश के आंतरिक सुरक्षा मोर्चे की रीढ़ कहे जाने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने एक बार फिर सभी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के बीच सबसे अधिक पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में बीएसएफ (BSF), आईटीबीपी (ITBP), सीआईएसएफ (CISF), एसएसबी (SSB) और असम राइफल्स भी शामिल हैं, लेकिन जटिल और सबसे जोखिम भरे ऑपरेशंस में निरंतर तैनाती के कारण सीआरपीएफ को वीरता और सेवा पदकों की सबसे बड़ी संख्या हासिल हुई है।

सीआरपीएफ को यह सम्मान मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र के वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए निर्णायक अभियानों और जम्मू-कश्मीर में काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशंस में दिखाई गई असाधारण बहादुरी के लिए मिला है। इन पदकों में कई पदक उन अमर शहीदों को मरणोपरांत भी प्रदान किए गए हैं जिन्होंने देश की अखंडता की रक्षा करते हुए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी।

नक्सल मोर्चे पर ऐतिहासिक प्रहार: 301 में से 197 वीरता पदक उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों को

इस बार के वीरता पदकों के वितरण का सबसे महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय पहलू यह रहा है कि कुल 301 वीरता पदकों में से सबसे बड़ा हिस्सा यानी 197 मेडल वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सुरक्षाकर्मियों को दिए गए हैं। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि केंद्र सरकार द्वारा 2026 तक देश से वामपंथी उग्रवाद के पूर्ण सफाए के संकल्प को धरातल पर उतारने में सुरक्षा बलों ने किस स्तर का आक्रामक और साहसिक अभियान चलाया है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा और कांकेर जैसे घने और दुर्गम जंगलों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के मांद में घुसकर सैकड़ों खूंखार कमांडरों को मार गिराया है और हजारों वर्ग किलोमीटर इलाके को लाल आतंक के चंगुल से मुक्त कराया है। इस संयुक्त अभियान में राज्य पुलिस बल (विशेष रूप से डीआरजी और कोबरा कमांडोज) के साथ सीआरपीएफ की टुकड़ियों ने अग्रिम पंक्ति में रहकर गोलियों का सामना किया, जिसे गृह मंत्रालय ने वीरता पदकों के जरिए सर्वोच्च मान्यता दी है।

जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के जांबाजों को भी मिला बड़ा सम्मान

नक्सल प्रभावित इलाकों के अलावा जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में तैनात 51 बहादुर सुरक्षाकर्मियों को उनकी अद्वितीय वीरता के लिए ‘वीरता पदक’ से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। बीते महीनों में सीमा पार से घुसपैठ करने वाले पाकिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए कई सफल ऑपरेशनों में सुरक्षा बलों ने बिना किसी नागरिक क्षति के आतंकियों को ढेर किया है।

इसके साथ ही, पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद विरोधी अभियानों और शांति बहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले 12 कर्मियों को तथा देश के विभिन्न अन्य राज्यों में गंभीर कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से निपटने वाले 41 कर्मियों को भी वीरता पदक से नवाजा गया है।

अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा को राष्ट्र का नमन

गृह मंत्रालय के अनुसार, वीरता पदक किसी भी अधिकारी या जवान को केवल सामान्य ड्यूटी करने के लिए नहीं मिलता, बल्कि अपनी जान की परवाह किए बिना नागरिकों की रक्षा करने, देश के दुश्मनों का सफाया करने और कर्तव्य की वेदी पर असाधारण जोखिम उठाने के सूक्ष्म आकलन के बाद दिया जाता है।

स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर घोषित ये पदक न केवल हमारे सुरक्षा बलों के मनोबल को सातवें आसमान पर ले जाते हैं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों को यह विश्वास भी दिलाते हैं कि जब तक सीआरपीएफ और हमारे वीर जवान सरहदों और आंतरिक मोर्चों पर तैनात हैं, तब तक भारत की संप्रभुता, शांति और तिरंगे की आन-बान-शान पर कोई आंच नहीं आ सकती।

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