‘ईरान पर दोबारा हमला ही आखिरी विकल्प…’, व्हाइट हाउस की सीक्रेट मीटिंग में नेतन्याहू ने ट्रंप को क्या बताया?

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की। लगभग 90 मिनट तक चली इस हाई-लेवल और बंद कमरे की बैठक (Closed-door Meeting) में दोनों नेताओं के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम और सैन्य रणनीतियों को लेकर गंभीर चर्चा हुई। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुलाकात में नेतन्याहू ने ट्रंप के सामने कुछ खास खुफिया जानकारियां (Intelligence) साझा की हैं।

क्या है नेतन्याहू का नया असेसमेंट?

इजरायल के ‘चैनल 12’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नेतन्याहू का मानना है कि मौजूदा हालात में ईरान के खिलाफ एक बार फिर से आक्रामक सैन्य कदम उठाना ही एकमात्र विकल्प बचा है।

  • टार्गेटेड ठिकाने: इजरायल का आकलन है कि यदि दोबारा हमले की नौबत आती है, तो उन चुनिंदा और नई जगहों को निशाना बनाया जाना चाहिए जिन्हें ईरान ने हाल ही में दोबारा तैयार किया है या जिन पर पहले हमले नहीं हुए थे।

  • शासन की स्थिरता पर असर: इजरायली पक्ष का मानना है कि इन बड़े और रणनीतिक हमलों से ईरानी शासन की स्थिरता को भी हिलाया जा सकता है।

ट्रंप पर दबाव नहीं, बल्कि फैसले का इंतजार

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने अमेरिका पर किसी भी प्रकार का सैन्य दबाव नहीं बनाया है। एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी ने कहा, “हम अमेरिका पर हमले के लिए कोई दबाव नहीं डाल रहे हैं। हम राष्ट्रपति ट्रंप के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं, जो जल्द ही यह तय करेंगे कि उन्हें इस दिशा में क्या करना है।” हालांकि, मुलाकात से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कुछ मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी झुंझलाहट भी जाहिर की थी, खासकर ‘पिकैक्स माउंटेन’ (Pickaxe Mountain) जैसी गुप्त परमाणु साइट से जुड़ी खुफिया रिपोर्टों के सार्वजनिक होने को लेकर।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की स्थिति

इस संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में लगातार बने तनाव के कारण दुनिया भर के कई देशों की कमर्शियल आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। तेल और गैस के दामों में आए उछाल के चलते वैश्विक बाजारों पर भी इसका असर साफ देखा जा रहा है, जिससे दोनों देशों के नेताओं पर इस संकट का जल्द से जल्द कोई ठोस समाधान निकालने का दबाव बना हुआ है।

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