औरैया डबल मर्डर केस: यूपी के पूर्व MLC कमलेश पाठक समेत 10 दोषियों को उम्रकैद, वकील और उनकी बहन की हत्या में एमपी-एमएलए कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

औरैया/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए समाजवादी पार्टी के पूर्व विधान परिषद सदस्य (MLC) कमलेश पाठक, उनके दो भाइयों समेत कुल 10 दोषियों को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर भारी अर्थदंड भी लगाया है। यह मामला 15 मार्च 2020 को दिनदहाड़े अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा चौबे की गोली मारकर की गई नृशंस हत्या से जुड़ा है। अदालत के इस फैसले के बाद चार साल से न्याय की आस लगाए बैठे पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली है, वहीं राजनीतिक गलियारों में भी हड़कंप मच गया है।

15 मार्च 2020 का वह खूनी मंजर: कैसे शुरू हुआ पंचमुखी मंदिर संपत्ति का विवाद

यह सनसनीखेज वारदात औरैया शहर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नारायणपुर मोहल्ले की है। विवाद की जड़ में पंचमुखी हनुमान मंदिर से जुड़ी करोड़ों की कीमती जमीन और मंदिर की देखरेख का अधिकार था। अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनका परिवार लंबे समय से इस मंदिर की व्यवस्था और संपत्ति से जुड़े कानूनी मामलों को देख रहे थे। दूसरी तरफ, इलाके में अपना सियासी और बाहुबली रसूख रखने वाले पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक इस संपत्ति और मंदिर के प्रबंधन पर अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते थे।

वारदात वाले दिन 15 मार्च 2020 को कमलेश पाठक अपने भाइयों संतोष पाठक, रमाकांत पाठक और असलहों से लैस करीब दर्जन भर समर्थकों के साथ मंदिर परिसर पर कब्जा करने की नीयत से पहुंचे थे। जब अधिवक्ता मंजुल चौबे ने उनके इस गैरकानूनी कदम का विरोध किया, तो विवाद गाली-गलौज से शुरू होकर हिंसक टकराव में बदल गया। देखते ही देखते कमलेश पाठक और उनके साथियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी की आवाज सुनकर जब मंजुल चौबे की चचेरी बहन सुधा चौबे अपने भाई को बचाने दौड़ीं, तो हमलावरों ने उन पर भी गोलियों की बौछार कर दी। दोनों भाई-बहन की मौके पर ही तड़प-तड़पकर मौत हो गई, जबकि परिवार के कुछ अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

एमपी-एमएलए कोर्ट का कड़ा रुख और ऐतिहासिक सजा का ऐलान

दिनदहाड़े हुए इस दोहरे हत्याकांड से पूरे उत्तर प्रदेश में सनसनी फैल गई थी और वकीलों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटना के मुख्य सूत्रधार पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाइयों और अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस केस की सुनवाई एमपी-एमएलए विशेष अदालत में कराई।

अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, बैलिस्टिक रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट पेश की गई। गवाहों ने बिना किसी भय के अदालत के समक्ष पूरी घटना की गवाही दी। बचाव पक्ष की तमाम दलीलों को खारिज करते हुए विशेष न्यायाधीश ने सभी 10 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 147 (बलवा), 148, 149 (समान उद्देश्य से गैरकानूनी जमावड़ा) और आयुध अधिनियम (Arms Act) के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थल पर कानून को हाथ में लेकर की गई ऐसी जघन्य वारदात समाज के लिए अस्वीकार्य है और दोषियों को उम्रकैद के साथ कड़े आर्थिक दंड की सजा सुनाई।

दोषियों की सूची: कमलेश पाठक के साथ इनके खिलाफ तय हुई सजा

अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए और सजा पाने वाले 10 प्रमुख व्यक्तियों में शामिल हैं:

  1. कमलेश पाठक (पूर्व एमएलसी एवं मुख्य षड्यंत्रकारी)

  2. संतोष पाठक (कमलेश पाठक का भाई)

  3. रमाकांत पाठक (कमलेश पाठक का भाई)

  4. कुलदीप पाठक

  5. प्रमोद पाठक

  6. अवनीश पाठक

  7. अंकित पाठक

  8. संजीव पाठक

  9. मुकेश पाठक

  10. राकेश

सजा सुनाए जाने के वक्त सभी आरोपी अदालत में प्रत्यक्ष रूप से मौजूद थे। फैसला आते ही अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए थे और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैले।

औरैया से लेकर बुंदेलखंड तक रहा है कमलेश पाठक का सियासी रसूख

कमलेश पाठक उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक समय समाजवादी पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में गिने जाते थे। औरैया, इटावा, कानपुर देहात और जालौन के सीमावर्ती इलाकों में उनका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव काफी गहरा रहा है। वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधान परिषद सदस्य (MLC) रहे और उनके भाई भी स्थानीय निकाय व पंचायत स्तर की राजनीति में सक्रिय रहे।

हालांकि, राजनीतिक रसूख के साथ-साथ कमलेश पाठक का नाम कई आपराधिक विवादों, जमीनी विवादों और बाहुबल के प्रदर्शन में भी सामने आता रहा। स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ कई संगीन मामले दर्ज थे। प्रशासन ने इस हत्याकांड के बाद उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की थी और उनकी कई अवैध संपत्तियों को कुर्क किया गया था। इस फैसले ने यह संदेश दिया है कि सियासी रसूख कितना भी बड़ा क्यों न हो, न्यायपालिका के सामने कानून का राज ही सर्वोपरि है।

पीड़ित परिवार का चार साल का संघर्ष और न्याय व्यवस्था पर भरोसा

अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा चौबे के परिवार के लिए यह चार साल का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण और खौफनाक रहा। रसूखदार बाहुबलियों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ते हुए परिवार को कई बार धमकियों और दबाव का सामना करना पड़ा। लेकिन स्थानीय बार एसोसिएशन और साथी वकीलों के अटूट समर्थन ने इस लड़ाई को कमजोर नहीं पड़ने दिया।

फैसले के बाद मंजुल चौबे के परिजनों ने भावुक होते हुए कहा कि भले ही उनके परिवार के दो होनहार सदस्यों की भरपाई कभी नहीं हो सकती, लेकिन अदालत के इस कड़े फैसले ने न्याय व्यवस्था पर उनके विश्वास को अमर कर दिया है। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि एक साथी अधिवक्ता और उनकी निर्दोष बहन के हत्यारों को कानून के तहत सख्त सजा मिलना न्यायिक प्रणाली की बड़ी जीत है।

कानून-व्यवस्था के लिहाज से बेहद अहम नजीर

उत्तर प्रदेश में अपराधियों और माफिया तत्वों के खिलाफ चल रही न्यायिक व प्रशासनिक कार्रवाई के दौर में औरैया कोर्ट का यह निर्णय एक मजबूत नजीर माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित मामलों में त्वरित सुनवाई और गवाहों की पुख्ता सुरक्षा के बल पर आए इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी बाहुबली की राजनीतिक ढाल उसे कानून की जद से नहीं बचा सकती। औरैया का यह दोहरा हत्याकांड अब न्यायिक इतिहास में एक ऐसे फैसले के रूप में दर्ज हो गया है जिसने पीड़ितों को समयबद्ध और ठोस न्याय दिलाया है।

Check Also

Vrindavan Omaxe Mall Accident: वृंदावन में बड़ा हादसा, ओमैक्स मॉल में अचानक गिरी भारी शटरिंग; 3 मजदूरों की दर्दनाक मौत, 1 गंभीर

धर्मनगरी मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध ओमैक्स मॉल परिसर में निर्माण और मरम्मत कार्य के …