अयोध्या। रामलला के दरबार से करोड़ों रुपये का चढ़ावा गायब होने के कथित आरोपों को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर जैसे ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हुईं, केंद्र और प्रदेश सरकार ने तुरंत मामले का संज्ञान लेते हुए पूरी सच्चाई पर रिपोर्ट तलब कर ली है। इसी बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र सोमवार को अचानक दिल्ली से अयोध्या पहुंच गए। नृपेंद्र मिश्र का यह दौरा आगामी 13 जून को प्रस्तावित समीक्षा बैठक से पहले हुआ है, जिसे इस विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। अयोध्या पहुंचते ही उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक आपातकालीन बैठक की।
अखिलेश यादव का तीखा वार, सीसीटीवी साक्ष्य की मांग
इस पूरे विवाद की शुरुआत समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने चढ़ावे की हेराफेरी का गंभीर आरोप लगाया। अखिलेश यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लगातार हमला बोलते हुए कहा कि इस मामले में ट्रस्ट के केवल एक पदाधिकारी का स्पष्टीकरण आना काफी नहीं है। उन्होंने मांग की कि ट्रस्ट के सभी सदस्यों को एक साथ बिठाकर देश के सामने स्थिति साफ की जाए।
सपा मुखिया ने आगे कहा कि दान की रकम और आंकड़ों के मिलान के लिए सीसीटीवी फुटेज के साक्ष्यों का सहारा लिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार की चुप्पी और ट्रस्ट के संक्षिप्त स्पष्टीकरण पर सवाल उठाते हुए इसे ‘शाब्दिक औपचारिकता’ करार दिया और कहा कि इससे दुनिया भर का सनातन समाज आहत और शंकित हुआ है।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का पलटवार: अखिलेश की सोच ‘बाबरवादी’
अखिलेश यादव के इन आरोपों पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बेहद तीखा पलटवार किया है। एक वीडियो संदेश जारी करते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि सपा मुखिया ने कभी भी सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का सम्मान नहीं किया है। ब्रजेश पाठक ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की सोच ‘बाबरवादी’ है, यही वजह है कि वे राम मंदिर को लेकर लगातार अफवाहें और झूठ गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भूमि पूजन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा समारोह तक, सपा मुखिया हमेशा चुप रहे और अब वे सनातन संस्कृति के विरुद्ध नैरेटिव सेट कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता इस झूठ को अच्छी तरह समझ चुकी है और साल 2027 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी को एक बार फिर इस कारगुजारी का भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
पुलिस और प्रशासन का रुख, बैंक कर्मचारियों की भूमिका पर चर्चा गर्म
अयोध्या के बदलते राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम के बीच स्थानीय पुलिस ने इस मामले में फिलहाल किसी भी तरह की गिरफ्तारी से साफ इन्कार किया है। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी टिप्पणी करने से दूरी बना रखी है। हालांकि, अयोध्या के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों के मुताबिक, रामलला के दानपात्रों से एकत्र होने वाली धनराशि को कड़ी सुरक्षा के बीच यात्री सुविधा केंद्र (पीएफसी) लाया जाता है, जहां सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी में एसबीआई (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) के कर्मचारी इसकी गिनती करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में एक निजी हायर एजेंसी के करीब दो दर्जन कर्मचारी भी सहयोग करते हैं।
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