काठमांडू: नेपाल की राजनीति में बुधवार को उस वक्त भूचाल आ गया जब प्रधानमंत्री बालेन शाह की कैबिनेट ने एक ऐतिहासिक और साहसिक फैसला लिया। सरकार ने साल 2006 के बाद से सार्वजनिक पदों पर रहे सभी बड़े राजनेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की गहन जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय आयोग का गठन किया है। इस जांच के रडार पर नेपाल के 7 पूर्व प्रधानमंत्री और सैकड़ों पूर्व मंत्री हैं, जो पिछले दो दशकों में सत्ता के गलियारों में काबिज रहे।
कौन-कौन से दिग्गज हैं जांच के दायरे में?
बालेन शाह सरकार के इस फैसले ने नेपाल के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक चेहरों की नींद उड़ा दी है। जांच की सूची में शामिल प्रमुख पूर्व प्रधानमंत्रियों के नाम इस प्रकार हैं:
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पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’
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शेर बहादुर देउबा
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केपी शर्मा ओली
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बाबूराम भट्टाराई
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माधव कुमार नेपाल
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झाला नाथ खनाल
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सुशील कोइराला (दिवंगत, उनके परिवार की संपत्ति की जांच हो सकती है)
इसके अलावा, दिवंगत गिरिजा प्रसाद कोइराला के परिवार और 2006 के बाद से अब तक रहे तमाम मंत्रियों और उच्चाधिकारियों की आय के स्रोतों को भी खंगाला जाएगा।
5 सदस्यीय ‘पावरफुल’ जांच आयोग का गठन
सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने बताया कि इस पांच सदस्यीय आयोग की कमान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश राजेंद्र कुमार भंडारी को सौंपी गई है।
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पैनल के सदस्य: पूर्व जज चंडी राज ढकाल, पुरुषोत्तम पराजुली, पूर्व डीआईजी गणेश केसी और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश लमसाल।
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कार्यकाल: आयोग को 2006 के जन आंदोलन-द्वितीय से लेकर वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 तक की अवधि के दौरान की गई सभी संपत्ति घोषणाओं की जांच करने का जिम्मा दिया गया है।
‘Gen-Z’ आंदोलन की जांच के लिए भी बना पैनल
संपत्ति जांच के साथ-साथ नेपाल सरकार ने पिछले वर्ष हुए ‘जेन-जी’ (Gen-Z) प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा तंत्र की भूमिका की समीक्षा के लिए भी एक तीन सदस्यीय पैनल बनाया है।
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विवाद की वजह: पिछले साल 8 और 9 सितंबर को हुए इन प्रदर्शनों में 76 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल उठे थे।
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पैनल प्रमुख: पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीश प्रेम राज कार्की को इसका अध्यक्ष बनाया गया है।
बालेन शाह का ‘क्लीन नेपाल’ मिशन
काठमांडू के मेयर से देश के प्रधानमंत्री तक का सफर तय करने वाले बालेन शाह ने इस कदम से साफ कर दिया है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलेंगे। नेपाल की जनता लंबे समय से बड़े राजनेताओं की संपत्ति की जांच की मांग कर रही थी। जानकारों का मानना है कि यह कदम नेपाल की राजनीति को पूरी तरह से साफ करने की दिशा में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
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