Bangladesh Political Crisis: बांग्लादेश के सबसे बड़े इस्लामी बैंक के नए चेयरमैन पर भारी बवाल, ढाका में हिंसक प्रदर्शन

पड़ोसी देश बांग्लादेश (Bangladesh) में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद भी राजनीतिक और प्रशासनिक उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। अब ताजा विवाद बांग्लादेश के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र से सामने आया है।

राजधानी ढाका में देश के सबसे बड़े निजी शरिया-आधारित बैंक ‘इस्लामी बैंक पीएलसी’ (Islami Bank PLC) के नए चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर सोमवार को भारी हिंसा भड़क गई। बैंक मुख्यालय के सामने हजारों की संख्या में जुटे ग्राहकों और बैंक कर्मचारियों के उग्र प्रदर्शन के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ उनकी सीधी व जोरदार झड़प हुई। हालात को बेकाबू होता देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस (Teargas), साउंड ग्रेनेड और वाटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया, जिसमें दर्जनों प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

‘सचेत ग्राहक मंच’ का मुख्य द्वार पर चक्काजाम, आंसू गैस से भरा इलाका

ढाका ट्रिब्यून सहित स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद तब बढ़ा जब ‘सचेत ग्राहक मंच’ और बैंक कर्मचारी यूनियन के बैनर तले सैकड़ों प्रदर्शनकारी सुबह ही बैंक के मुख्य मुख्यालय के गेट पर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर ले रखे थे, जिन पर लिखा था—“खुर्शीद आलम इस्तीफा दो”, “मनी लॉन्ड्रर को चेयरमैन मत बनाओ” और “इस्लामी बैंक बचाओ”।

पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक हटने की चेतावनी दी, लेकिन जब भीड़ ने मुख्य द्वार खाली करने से साफ इनकार कर दिया, तो सुरक्षा बल आक्रामक हो गए। पुलिसिया कार्रवाई के बाद पूरा इलाका आंसू गैस के धुएं से भर गया। पानी की तेज धार और लाठीचार्ज के कारण कई बुजुर्गों और महिला ग्राहकों को गंभीर चोटें आईं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

कौन हैं खुर्शीद आलम और क्यों हो रहा है उनका विरोध?

इस पूरे बवाल की जड़ में बांग्लादेश सरकार का वह हालिया फैसला है, जिसके तहत बांग्लादेश बैंक (केंद्रीय बैंक) के पूर्व डिप्टी गवर्नर खुर्शीद आलम को इस्लामी बैंक पीएलसी का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है।

प्रदर्शनकारियों, कर्मचारी यूनियनों और आर्थिक विश्लेषकों ने इस नियुक्ति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनके मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

  • भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप: प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासनकाल के दौरान खुर्शीद आलम जब डिप्टी गवर्नर पद पर थे, तब वे बड़े पैमाने पर हुए वित्तीय घोटालों और मनी लॉन्ड्रिंग (पैसों की हेराफेरी) में संलिप्त थे।

  • व्यापारी एस. आलम से सांठगांठ: आरोप है कि खुर्शीद आलम ने बांग्लादेश के कुख्यात और बड़े उद्योगपति ‘एस. आलम’ के साथ मिलीभगत कर देश के विभिन्न बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का गबन (Fradu) करने और उसे विदेश भेजने में सीधी मदद की थी।

  • विश्वसनीयता पर संकट: आंदोलनकारियों का कहना है कि ऐसे दागी और विवादित पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को शीर्ष पद पर बिठाने से इस प्रतिष्ठित बैंक की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता और ‘शरिया अनुपालन’ (Sharia Compliance) पूरी तरह खतरे में पड़ जाएंगे।

बैंकिंग क्षेत्र पर ‘जमात-ए-इस्लामी’ और अवामी लीग की राजनीतिक जंग?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस हिंसक विरोध प्रदर्शन के तार बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति से गहरे जुड़े हुए हैं। इस्लामी बैंक पीएलसी पर लंबे समय से देश के कट्टरपंथी संगठन और राजनीतिक दल ‘जमात-ए-इस्लामी’ का परोक्ष या अपरोक्ष रूप से मजबूत प्रभाव माना जाता रहा है।

शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग के सत्ता से हटने के बाद से ही बांग्लादेश के इस्लामी बैंकिंग क्षेत्र में अपना-अपना वर्चस्व स्थापित करने का खेल तेज हो गया है।

  • एक धड़े का मानना है कि खुर्शीद आलम की नियुक्ति असल में अवामी लीग के बचे-खुचे प्रभाव और तंत्र को बैंकिंग सिस्टम से पूरी तरह साफ करने की एक प्रशासनिक कवायद है।

  • वहीं दूसरी ओर, विरोधी और जमात के समर्थक इसे सीधे तौर पर ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ और बैंक को हथियाने की साजिश बता रहे हैं।

वर्तमान स्थिति: बैंक में कामकाज ठप, भारी पुलिस बल तैनात

ताजा अप्डेट्स के अनुसार, भीषण लाठीचार्ज के बाद प्रदर्शनकारी मुख्य मार्ग से हटकर आसपास की तंग गलियों में जमा हैं और वहां से लगातार सरकार विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं। वहीं, किसी भी संभावित बड़े हमले और दंगे को रोकने के लिए बैंक मुख्यालय और मोतीझील (ढाका का वित्तीय केंद्र) के आसपास के इलाकों में भारी मात्रा में सशस्त्र पुलिस बल और दंगा रोधी वाहनों को तैनात किया गया है।

सभी प्रमुख सड़कें बंद होने के कारण ढाका के इस मुख्य हिस्से में यातायात (Traffic) पूरी तरह ठप है। बैंक के भीतर भी अधिकारी और कर्मचारी काम नहीं कर पा रहे हैं, जिससे करोड़ों रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ है। ढाका में स्थिति बेहद नाजुक और तनावपूर्ण बनी हुई है।

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