UP Cabinet Decision: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कैबिनेट बैठक में जनहित और बुनियादी ढांचे से जुड़े 30 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगा दी है। इनमें सबसे प्रमुख निर्णय जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और धोखाधड़ी रोकने से संबंधित है।
1. खतौनी की जांच के बाद ही रजिस्ट्री
अब उत्तर प्रदेश में जमीन की रजिस्ट्री तब तक नहीं होगी जब तक खतौनी (Land Records) का डिजिटल सत्यापन नहीं हो जाता।
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उद्देश्य: भू-माफियाओं पर लगाम कसना और एक ही जमीन को कई बार बेचे जाने की धोखाधड़ी को रोकना।
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प्रक्रिया: निबंधन विभाग (Registry Department) के पोर्टल को राजस्व विभाग के डेटाबेस से पूरी तरह लिंक किया जाएगा। रजिस्ट्री के समय सॉफ्टवेयर खुद ही खतौनी की जांच करेगा कि जमीन बेचने वाले के नाम पर है या नहीं।
2. अन्य प्रमुख कैबिनेट निर्णय
जमीन के अलावा, कैबिनेट ने विकास और सुरक्षा से जुड़े कई अन्य बड़े फैसले लिए हैं:
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औद्योगिक विकास: नए औद्योगिक गलियारों (Industrial Corridors) के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
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शिक्षा और स्वास्थ्य: कुछ जिलों में नए मेडिकल कॉलेजों और पीपीपी मॉडल पर स्कूलों के संचालन को मंजूरी दी गई है।
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नगर विकास: नगर निगमों के विस्तार और नई नगर पंचायतों के गठन के प्रस्तावों को हरी झंडी मिली है।
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पर्यटन: अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे धार्मिक केंद्रों में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के लिए बजट आवंटित किया गया है।
इस निर्णय का आप पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यदि आप उत्तर प्रदेश में संपत्ति खरीदने या बेचने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको निम्नलिखित लाभ होंगे:
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सुरक्षित निवेश: फर्जी दस्तावेजों के आधार पर होने वाली रजिस्ट्री बंद होगी।
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कम कानूनी विवाद: चूंकि खतौनी की जांच पहले ही हो जाएगी, इसलिए बाद में कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने की संभावना कम हो जाएगी।
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त्वरित म्यूटेशन (दाखिल-खारिज): रजिस्ट्री के साथ ही डेटा अपडेट होने से दाखिल-खारिज की प्रक्रिया भी तेज होगी।
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विशेष नोट: यह कदम “ई-गवर्नेंस” को बढ़ावा देने और आम आदमी को तहसील के चक्करों से बचाने के लिए उठाया गया है।
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