PM Modi New Zealand Visit: भारत अपनी वैश्विक व्यापार कूटनीति को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही न्यूजीलैंड के ऐतिहासिक दौरे पर जा रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ सकता है। इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण ‘भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता’ (FTA) होने वाला है, जिस पर लंबे समय से बातचीत चल रही है। अमर उजाला की इस विशेष रिपोर्ट में जानें कि कैसे यह डील भारतीय किसानों और व्यापारियों की किस्मत बदल सकती है और क्यों पीयूष गोयल का आगामी कनाडा दौरा भी बेहद अहम है।
मोदी की यात्रा और FTA की बिसात
विश्व व्यापार संगठन (WTO) की 14वीं मंत्री स्तरीय बैठक के दौरान केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता ने पीएम मोदी की यात्रा का रास्ता साफ कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, इस यात्रा के दौरान एक उच्च स्तरीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल भी पीएम के साथ जाएगा। न्यूजीलैंड सरकार इस दौरे को लेकर खासी उत्साहित है और कई महत्वपूर्ण समझौतों की सूची को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
सिर्फ व्यापार नहीं, खेती और खेल में भी मचेगी धूम
यह समझौता केवल सामानों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहेगा। भारत और न्यूजीलैंड के बीच कृषि और खेल क्षेत्र में भी गहरी साझेदारी होने वाली है।
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किसानों को ट्रेनिंग: भारतीय किसानों को कीवी और सेब की आधुनिक खेती का प्रशिक्षण देने के लिए न्यूजीलैंड मदद करेगा।
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तकनीकी सहयोग: दोनों देशों के बीच व्यावहारिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए कृषि तकनीक साझा करने पर भी सहमति बनी है।
कनाडा के साथ भी ‘सुपर डील’ की तैयारी
न्यूजीलैंड के साथ-साथ भारत ने कनाडा के साथ भी अपने व्यापारिक रिश्तों की जमी हुई बर्फ पिघलानी शुरू कर दी है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल मई 2026 में कनाडा का दौरा करेंगे। WTO बैठक के दौरान उन्होंने कनाडा के मंत्री मनिंदर सिद्धू से मुलाकात कर CEPA (व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता) वार्ताओं को तेज करने पर जोर दिया है। इस यात्रा के दौरान एयरोस्पेस, रक्षा, अंतरिक्ष और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) जैसे हाई-टेक क्षेत्रों में सहयोग पर मुहर लग सकती है।
WTO में भारत का सख्त रुख: “पुराने वादे पहले निभाएं”
कैमरून में चल रही WTO की MC-14 बैठक में भारत ने दो टूक शब्दों में अपनी बात रखी है। भारत ने जोर दिया कि विश्व व्यापार संगठन को नए मुद्दों पर कूदने से पहले कृषि क्षेत्र में किए गए पुराने वादों को पूरा करना चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया कि विकासशील देशों के किसानों के हितों की रक्षा करना उसकी पहली प्राथमिकता है। कनाडा ने भी भारत की इन चिंताओं का सम्मान करते हुए रचनात्मक सहयोग का वादा किया है।
फार्मा और शिक्षा में खुलेंगे नए रास्ते
भारत और कनाडा के बीच केवल भारी उद्योगों ही नहीं, बल्कि फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन और शिक्षा क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की रणनीति तैयार की गई है। जहाज निर्माण (Shipbuilding) और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश मिलकर काम करने की संभावना तलाश रहे हैं। इन अंतरराष्ट्रीय दौरों से साफ है कि भारत अब वैश्विक सप्लाई चेन में एक अपरिहार्य शक्ति बनने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा चुका है।
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