
उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे और आवागमन को आधुनिक रफ्तार देने के लिए बनाए गए महत्वाकांक्षी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के तुरंत बाद ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस सड़क को जनता की यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए लाखों-करोड़ों की लागत से तैयार किया गया था, वह शुरुआती दिनों में ही अपनी गुणवत्ता को लेकर चर्चा का केंद्र बन गई है। इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट के उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों के भीतर सड़क का कई जगहों पर धंसना और डामर उखड़ना शासन-प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कई प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर बड़े फेरबदल और कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे महकमे में हड़कंप मच गया है।
20 दिनों के भीतर आठ स्थानों पर सड़क धंसने से मचा हड़कंप
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का भव्य लोकार्पण 13 जुलाई को देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कर-कमलों द्वारा किया गया था। इसके अगले ही दिन यानी 14 जुलाई की सुबह 8 बजे से इस पर आम जनता के लिए यातायात सुचारू रूप से शुरू कर दिया गया था। लेकिन यह खुशी ज्यादा लंबी नहीं टिक पाई। महज़ 12 दिनों के भीतर, 26 जुलाई को उन्नाव जिले के कुरारी गांव के पास कानपुर-लखनऊ लेन में किलोमीटर-64 पर पहली बार सड़क का तारकोल उखड़ने और आसपास का हिस्सा धंसने की चौंकाने वाली घटना सामने आई। इसके बाद सिलसिलेवार तरीके से अगस्त के पहले हफ्ते तक एक्सप्रेसवे पर कुल आठ अलग-अलग स्थानों पर सड़क के उखड़ने और धंसने की घटनाएं सामने आईं, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवालिया निशान लग गए।
एनएचएआई का कड़ा प्रशासनिक एक्शन: प्रोजेक्ट डायरेक्टर हटाए गए
बार-बार हो रहे हादसों और सड़क खराब होने की घटनाओं के बाद एनएचएआई (NHAI) मुख्यालय ने मामले की गंभीरता को समझते हुए प्रशासनिक स्तर पर तत्काल प्रभाव से गाज गिरानी शुरू कर दी है। प्राधिकरण ने कानपुर एक्सप्रेसवे परियोजना के परियोजना निदेशक (पीडी) नकुल प्रकाश वर्मा को उनके पद से हटाते हुए सीधे उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया है। उनके साथ ही, इस परियोजना से जुड़े रहे पूर्व पीडी सौरभ चौरसिया के खिलाफ भी गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए आरोप पत्र (चार्शीट) देने की पूरी तैयारी कर ली गई है। प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए लखनऊ पीडी का अतिरिक्त कार्यभार अब बरेली के पीडी नवरत्न को सौंप दिया गया है, ताकि परियोजना के सुचारू संचालन और मरम्मत कार्यों की मॉनिटरिंग में कोई ढिलाई न बरती जाए।
निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक ‘नॉन परफॉर्मर’ घोषित, तीन करोड़ का खर्च खुद उठाएगी
केवल प्रशासनिक अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि इस परियोजना को जमीन पर उतारने वाली निर्माण एजेंसी पर भी एनएचएआई का हंटर चला है। एनएचएआई के मुख्य महाप्रबंधक एवं उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक (PNC Infratech) को आधिकारिक तौर पर ‘नॉन परफॉर्मर’ (Non-Performer) घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही, निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली स्वतंत्र इंजीनियरिंग सलाहकार संस्था ‘थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए उन्हें भविष्य की किसी भी नई परियोजना से प्रतिबंधित (डबार) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एनएचएआई ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि एक्सप्रेसवे के जितने भी हिस्से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनका पूरा पुनर्निर्माण पीएनसी इंफ्राटेक अपने निजी खर्चे पर करेगी। अनुमान के मुताबिक इस मरम्मत कार्य पर करीब तीन करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसे कंपनी को ही वहन करना होगा।
आईआईटी खड़गपुर और लेजर तकनीक से होगी सड़क की हाई-टेक जांच
सड़क की खराब गुणवत्ता के असल कारणों का पता लगाने और तकनीकी कमियों को उजागर करने के लिए एनएचएआई ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान की मदद लेने का निर्णय लिया है। एनएचएआई के मुख्य महाप्रबंधक गौतम विशाल ने बताया कि प्राधिकरण अब पूरे एक्सप्रेसवे की अत्याधुनिक ‘लेजर प्रोफाइलोमीटर’ तकनीक से जांच कराएगा। इस आधुनिक तकनीक की मदद से सड़क की सतह की सूक्ष्म से सूक्ष्म खामियों, असमानताओं और छिपे हुए आंतरिक दोषों का सटीक आकलन किया जा सकेगा। इसके अलावा, तकनीकी खामियों की गहराई से समीक्षा के लिए आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर केएस रेड्डी की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। यह विशेष समिति सड़क की मूल डिजाइन, उपयोग की गई निर्माण सामग्री, निर्माण पद्धति, जल निकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था, आधार परत और गुणवत्ता नियंत्रण मानकों की बारीकी से जांच करेगी और अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी ताकि यह साफ हो सके कि इतनी जल्दी सड़क बार-बार क्यों धंस रही है।
यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि: मरम्मत पूरी होने तक एक्सप्रेसवे रहेगा पूरी तरह टोल फ्री
आम नागरिकों की सुरक्षा और यात्रा की सुगमता को ध्यान में रखते हुए एनएचएआई ने एक राहत भरा और कड़ा कदम उठाया है। जब तक एक्सप्रेसवे के सभी क्षतिग्रस्त हिस्सों की पूरी तरह से मरम्मत नहीं हो जाती और तकनीकी जांच रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित नहीं हो जाते, तब तक इस एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से ‘टोल फ्री’ कर दिया गया है। यानी यात्रियों को फिलहाल किसी भी प्रकार का टोल टैक्स नहीं चुकाना होगा। जिन स्थानों पर सड़क धंसी या मरम्मत का कार्य चल रहा है, वहां पर यातायात को सुरक्षित तरीके से डायवर्ट कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके और गाड़ियां बिना किसी बाधा के अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।
स्थानीय और भौगोलिक महत्व: उत्तर प्रदेश के इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए सबक
कानपुर और लखनऊ जैसे उत्तर प्रदेश के दो सबसे प्रमुख औद्योगिक और प्रशासनिक महानगरों को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे राज्य के आर्थिक विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इस मार्ग पर रोजाना हजारों छोटे-बड़े व्यावसायिक और निजी वाहन गुजरते हैं। ऐसे में शुरुआती दौर में ही इस तरह की संरचनात्मक विफलता आना न केवल प्रशासनिक दक्षता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि देश के बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एनएचएआई द्वारा की गई यह त्वरित कार्रवाई आने वाले अन्य सड़क निर्माण प्रोजेक्ट्स के लिए एक बड़ा सबक है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में जनता के खून-पसीने की कमाई से बने इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता में कोई चूक न हो।
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