उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका: जून से 10% अतिरिक्त शुल्क का बोझ, जानें क्या है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश के लगभग 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बुरी खबर है। यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने बिजली बिल में 10 प्रतिशत अतिरिक्त चार्ज (सरचार्ज) लगाने का फैसला किया है। यह बढ़ोत्तरी जून महीने से लागू होगी और आने वाले बिलों में यह अतिरिक्त शुल्क जुड़कर आएगा।

क्या है उपभोक्ताओं पर असर?

  • महंगाई की मार: इस निर्णय के बाद प्रति 100 रुपये के बिल पर उपभोक्ताओं को 10 रुपये अतिरिक्त भुगतान करना होगा।

  • अतिरिक्त बोझ: आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह 10 प्रतिशत का अधिभार जुलाई महीने में भी जारी रहने की आशंका है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

  • प्रभावित वर्ग: इस फैसले का असर घरेलू, व्यावसायिक और अन्य सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

क्यों बढ़ाई गई बिजली?

पावर कॉरपोरेशन ने इसे ‘फ्यूल सरचार्ज’ का नाम दिया है। आरोप है कि मार्च 2026 में बिजली खरीद की वास्तविक लागत (4.94 रुपये प्रति यूनिट) के मुकाबले अधिक दर (5.86 रुपये प्रति यूनिट) पर बिजली खरीदी गई, जिससे लगभग 1,610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। इसी भरपाई के लिए उपभोक्ताओं से यह शुल्क वसूला जा रहा है।

विरोध और आपत्तियां:

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है:

  • उच्चस्तरीय जांच की मांग: परिषद का आरोप है कि महंगी बिजली किन निजी उत्पादक कंपनियों से और किन परिस्थितियों में खरीदी गई, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

  • उपभोक्ता अधिशेष का तर्क: परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का दावा है कि कंपनियों के पास पहले से ही 51,000 करोड़ रुपये से अधिक का ‘कंज्यूमर सरप्लस’ मौजूद है, फिर भी उपभोक्ताओं पर बोझ डालना अनुचित है।

  • मांग: परिषद ने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से इस वृद्धि को तत्काल रोकने की मांग की है।

एक राहत की खबर: मुकदमों का खर्च अब जनता पर नहीं

एक सकारात्मक बदलाव यह है कि अब यूपी पावर कॉरपोरेशन जनता के पैसों से जनता के खिलाफ मुकदमे नहीं लड़ सकेगा। अब तक कंपनियां मुकदमों के खर्च को ‘घाटे’ के रूप में दिखाती थीं और उसकी भरपाई बिजली दरों में बढ़ोतरी करके करती थीं।

  • नियम बदलाव: उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने अब यह व्यवस्था सुनिश्चित की है कि मुकदमेबाजी का खर्च पावर कॉरपोरेशन और कंपनियां अपने स्वयं के लाभ (खुद के स्रोतों) से वहन करेंगी। वे इस खर्च को बिजली दरों में बढ़ोतरी का आधार नहीं बना सकेंगी। पिछले वर्ष ही पावर कॉरपोरेशन और एनपीसीएल ने मुकदमों पर लगभग 46 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जिसे अब उपभोक्ताओं से वसूलना संभव नहीं होगा।

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