
नई दिल्ली/प्रयागराज। हिंदी साहित्य के गलियारों से एक गौरवशाली खबर सामने आई है। देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था साहित्य अकादमी ने वर्ष 2025 के वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा कर दी है, जिसमें हिंदी भाषा के लिए वरिष्ठ कथाकार और प्रख्यात लेखिका ममता कालिया के नाम पर मुहर लगाई गई है। ममता कालिया को यह सर्वोच्च सम्मान उनके बहुचर्चित संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए दिया जा रहा है। इस घोषणा के बाद साहित्य प्रेमियों और विशेषकर प्रयागराज के बौद्धिक समाज में खुशी की लहर दौड़ गई है।
‘जीते जी इलाहाबाद’ में सिमटा है एक दौर का इतिहास
ममता कालिया की पुरस्कृत कृति ‘जीते जी इलाहाबाद’ केवल एक संस्मरण नहीं है, बल्कि यह उस शहर की जीवंतता और साहित्यिक विरासत का दस्तावेज है जिसने हिंदी साहित्य को कई महान विभूतियां दीं। इस किताब में लेखिका ने इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के अपने अनुभवों, वहां के अनूठे साहित्यिक माहौल और समकालीन लेखकों के साथ बिताए पलों को बेहद आत्मीयता के साथ उकेरा है। चयन समिति का मानना है कि इस कृति ने संस्मरण विधा को एक नई ऊंचाई प्रदान की है, जो पाठकों को उस दौर की यादों में ले जाती है।
साहित्यिक गलियारों में जश्न का माहौल
ममता कालिया को यह सम्मान दिए जाने की खबर मिलते ही उन्हें बधाई देने वालों का तांता लग गया है। हिंदी कथा साहित्य में ‘दुक्खम-सुक्खम’ और ‘बेघर’ जैसे उपन्यासों से अपनी खास पहचान बनाने वाली ममता कालिया को मिला यह सम्मान उनके दशकों लंबे साहित्यिक तप का प्रतिफल माना जा रहा है। साहित्यकारों का कहना है कि उनकी लेखनी में जो सादगी और गहराई है, वह पाठकों को सीधे तौर पर जोड़ती है। ‘जीते जी इलाहाबाद’ के माध्यम से उन्होंने उस कालखंड को अमर कर दिया है जो हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग कहलाता था।
जल्द आयोजित होगा सम्मान समारोह
साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित होने वाले विशेष ‘साहित्योत्सव’ समारोह में ममता कालिया को पुरस्कार स्वरूप एक लाख रुपये की नकद राशि, उत्कीर्ण फलक और शॉल भेंट कर सम्मानित किया जाएगा। गौरतलब है कि ममता कालिया इससे पहले भी व्यास सम्मान सहित कई बड़े पुरस्कारों से नवाजी जा चुकी हैं। उनकी इस उपलब्धि पर प्रयागराज और दिल्ली सहित देश भर के हिंदी संस्थानों ने हर्ष व्यक्त किया है।
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