
वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका के ‘अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग’ (USCIRF) की एक ताजा रिपोर्ट ने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है। आयोग ने नवनिर्वाचित ट्रंप प्रशासन से सिफारिश की है कि भारत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ (RAW) पर लक्षित प्रतिबंध (Targeted Sanctions) लगाए जाएं। इस चौंकाने वाली सिफारिश के बाद भारत और अमेरिका के राजनयिक संबंधों में नई बहस छिड़ने के संकेत मिल रहे हैं।
धार्मिक स्वतंत्रता में कमी का लगाया गंभीर आरोप
अमेरिकी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में भारत के आंतरिक हालातों पर तीखी टिप्पणी की है। आयोग का दावा है कि भारत में पिछले कुछ समय में अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे में कमी आई है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इन संगठनों की गतिविधियों और नीतियों के कारण देश के भीतर धार्मिक सौहार्द प्रभावित हो रहा है। इसी आधार पर आयोग ने ट्रंप प्रशासन को सुझाव दिया है कि इन संस्थाओं से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों और तंत्र पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए।
रॉ (RAW) को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घेराबंदी
विशेष बात यह है कि इस बार केवल सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों को ही नहीं, बल्कि भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ को भी निशाने पर लिया गया है। पिछले कुछ महीनों में कनाडा और अमेरिका में हुए कुछ घटनाक्रमों का हवाला देते हुए आयोग ने रॉ पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आयोग का मानना है कि इन संस्थाओं पर दबाव बनाकर ही भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को ‘सुधारा’ जा सकता है।
ट्रंप प्रशासन के रुख पर टिकी दुनिया की नजरें
हालांकि, यह केवल एक सिफारिश है और अंतिम निर्णय डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन को लेना है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंध काफी प्रगाढ़ माने जाते हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप प्रशासन अपने ही देश के आयोग की इन विवादास्पद सिफारिशों को स्वीकार करता है या फिर भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देते हुए इन्हें ठंडे बस्ते में डाल देता है। भारत सरकार ने हमेशा से ही इस आयोग की रिपोर्ट्स को पक्षपातपूर्ण और जमीनी हकीकत से दूर बताया है।
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