पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: कोर्ट ने कहा- ‘राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का मामला, हिरासत की जरूरत नहीं’

नई दिल्ली। पिछले तीन सप्ताह से असम पुलिस की कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने खेड़ा की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए न केवल उन्हें राहत दी, बल्कि गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश को भी खारिज कर दिया। जस्टिस जेके माहेश्वरी और एएस चंदूरकर की बेंच ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे प्रथम दृष्टया ‘राजनीति से प्रेरित’ करार दिया।

‘निजी स्वतंत्रता की रक्षा सर्वोपरि’

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि पवन खेड़ा की निजी स्वतंत्रता की रक्षा किया जाना कानूनन जरूरी है। बेंच ने टिप्पणी की, “आरोप और प्रत्यारोप पहली नजर में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से उपजे लग रहे हैं। यह मामला ऐसा नहीं है जिसमें आरोपी को कस्टडी में लेकर ही पूछताछ करना अनिवार्य हो।” अदालत ने माना कि चुनावी माहौल के दौरान दिए गए बयानों और लगाए गए आरोपों के पीछे अक्सर राजनीतिक विवाद होता है, जिसे कस्टडी का आधार नहीं बनाया जा सकता।

अभिषेक मनु सिंघवी बनाम सॉलिसिटर जनरल

पवन खेड़ा की ओर से पैरवी कर रहे दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जो भी सामग्री दिखाई गई थी, वह पहले से ही सार्वजनिक है और अधिकारियों के पास उपलब्ध है। ऐसे में गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई अनावश्यक है।

दूसरी ओर, असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विरोध करते हुए कहा कि दिखाए गए दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी थे, इसलिए यह जांचना जरूरी है कि वे कहां से आए। हालांकि, अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि चूंकि मामला चुनाव प्रचार और राजनीतिक विवाद से जुड़ा है, इसलिए इसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

असम सीएम के बयानों का भी हुआ जिक्र

सुनवाई के दौरान अदालत में यह भी कहा गया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मामले में खुद कई सार्वजनिक बयान दिए हैं। रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों को देखते हुए बेंच ने महसूस किया कि इस कानूनी प्रक्रिया के पीछे राजनीतिक रंग गहरा है। कोर्ट ने कहा कि जब यह प्रतीत हो कि मामला राजनीति से प्रेरित है, तो संबंधित व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता का ख्याल रखना न्यायालय का दायित्व बन जाता है।

राहत के साथ कुछ शर्तें भी लागू

सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत देते हुए कुछ शर्तें भी रखी हैं:

  • वे अदालत की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।

  • मामले से जुड़े किसी भी सबूत के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे।

  • पुलिस जांच और पूछताछ में उन्हें पूरा सहयोग करना होगा।

अदालत ने अंत में यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल ‘अग्रिम जमानत’ को लेकर है और मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही की प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से जारी रहेगी।

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