श्रीनगर/नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस बर्बर आतंकी हमले को आज एक साल पूरा हो गया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। 22 अप्रैल 2025 को हुए इस हमले की बरसी पर एक ऐसी सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई है, जिसने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, पहलगाम हमले के बाद से वैश्विक आतंकी संगठन हमास (Hamas) और पाकिस्तान समर्थित आतंकी गुटों के बीच नजदीकियां खतरनाक स्तर तक बढ़ गई हैं।
हमास स्टाइल में हुआ था पहलगाम हमला!
न्यूज 18 की एक विशेष रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से चौंकाने वाला दावा किया गया है। जांच में पाया गया कि पिछले साल पहलगाम में जिस तरह 26 निर्दोष लोगों की पहचान पूछकर हत्या की गई थी, उसमें अपनाई गई रणनीति और बर्बरता काफी हद तक हमास द्वारा इजरायल पर किए गए 7 अक्टूबर 2023 के हमले से मिलती-जुलती थी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह केवल इत्तेफाक नहीं, बल्कि आतंकियों के बीच बढ़ते ‘ऑपरेशनल तालमेल’ का नतीजा है।
एक साल में चार ‘सीक्रेट मीटिंग्स’: कहां-कहां हुई बैठक?
रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा इन आतंकी गुटों के बीच हुई गुप्त मुलाकातों को लेकर हुआ है। अप्रैल 2025 से अब तक हमास के प्रतिनिधियों और पाक समर्थित आतंकियों के बीच कम से कम चार बड़ी बैठकें हो चुकी हैं।
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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK): सीमा के करीब रणनीति तैयार करने के लिए बैठक हुई।
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पाकिस्तान के दो प्रमुख शहर: यहां लश्कर और जैश के आकाओं के साथ हमास के संपर्क की बात सामने आई है।
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बांग्लादेश के दो ठिकाने: आतंकी नेटवर्क ने भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी अपने गुपचुप ठिकाने बनाए हैं, जहां ये मीटिंग्स आयोजित की गईं।
लश्कर और जैश के साथ हमास का ‘खतरनाक नेटवर्क’
भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार, इस नए गठजोड़ में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे खूंखार संगठन मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। यह गठबंधन अब केवल विचारधारा तक सीमित नहीं है, बल्कि हथियारों की सप्लाई, लॉजिस्टिक सपोर्ट और हमला करने की ट्रेनिंग साझा करने के स्तर तक पहुंच गया है। आशंका जताई जा रही है कि ये संगठन भारत में किसी बड़े ‘सेकेंडरी बेस’ को तैयार करने की फिराक में हैं।
ऑपरेशन सिंदूर का खौफ और नई चुनौती
पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर आतंकियों को करारा जवाब दिया था, लेकिन अब हमास और पाकिस्तानी आतंकियों की यह जुगलबंदी नई सुरक्षा चुनौतियां पेश कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय आतंकी गुटों का स्थानीय गुटों के साथ मिलना कश्मीर की शांति के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। फिलहाल, भारतीय एजेंसियां सीमा पर और डिजिटल नेटवर्क पर कड़ी नजर रख रही हैं ताकि इस ‘हमास-पाक एक्सेस’ को नेस्तनाबूद किया जा सके।
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