Birthright Citizenship Ruling: जन्मजात नागरिकता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भड़के डोनाल्ड ट्रंप, शी जिनपिंग और चीन को बधाई देकर कसा तीखा तंज

अमेरिका में जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता (Birthright Citizenship) को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अमेरिकी राजनीति में भूचाल आ गया है। इस फैसले पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद तीखी और आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने अपनी इस अदालती हार के बाद न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट पर निराशा जताई, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक बेहद हैरान करने वाला पोस्ट साझा करते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को तंजिया लहजे में बधाई दे डाली।

“राष्ट्रपति शी जिनपिंग और महान देश चीन को बधाई” — ट्रंप का तंज

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा जन्मजात नागरिकता के अधिकार को 6-3 के बहुमत से बरकरार रखने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ‘एक्स’ पर लिखा:

“मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग और महान देश चीन को उनकी ‘बर्थराइट सिटिजनशिप’ (जन्मसिद्ध नागरिकता) पर इस बड़ी जीत के लिए बधाई देना चाहता हूं।”

क्या है इस तंज का मतलब?

दरअसल, ट्रंप प्रशासन लगातार यह दलील दे रहा था कि अमेरिका का यह कानून ‘बर्थ टूरिज्म’ (Birth Tourism) को बढ़ावा देता है, जिसके तहत चीन और अन्य देशों के अमीर नागरिक सिर्फ इसलिए वीजा लेकर अमेरिका आते हैं ताकि उनके बच्चे को वहां जन्म मिलते ही अमेरिकी पासपोर्ट और नागरिकता मिल सके। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इस ‘बर्थ टूरिज्म’ पर रोक लगाने का उनका सपना टूट गया, जिसके चलते उन्होंने चीन का नाम लेकर यह तंज कसा।

संविधान संशोधन की जरूरत नहीं, कांग्रेस बना सकती है कानून: ट्रंप

अदालती झटके के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने हार नहीं मानी है। उन्होंने अमेरिकी संसद (Congress) से इस व्यवस्था को पलटने के लिए सीधे हस्तक्षेप की मांग की है:

  • संसद से अपील: ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस से अपील की है कि वह आज से ही जन्मजात नागरिकता को हमेशा के लिए समाप्त करने के लिए एक नया कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू करे।

  • ट्रंप का नया कानूनी तर्क: ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की इस कानूनी प्रक्रिया से अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि इस व्यवस्था में बदलाव करने के लिए किसी लंबे और जटिल संवैधानिक संशोधन (Constitutional Amendment) की जरूरत नहीं है, बल्कि कांग्रेस एक साधारण कानून बनाकर भी इसे खत्म कर सकती है। उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्रपति के पूर्ण समर्थन के साथ संसद इस आवश्यक कानून को आसानी से पारित कर देगी।

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स का ऐतिहासिक वक्तव्य: “यह हर बच्चे से किया वादा था”

दूसरी तरफ, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में देश के संवैधानिक इतिहास की एक बेहद मजबूत लकीर खींची है। बहुमत का फैसला पढ़ते हुए चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकारी आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें अवैध प्रवासियों या अस्थायी वीजा (टूरिस्ट/स्टूडेंट) पर रह रहे लोगों के बच्चों को नागरिकता से वंचित करने की बात कही गई थी।

चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स ने संविधान के 14वें संशोधन (14th Amendment) का हवाला देते हुए कहा:

“नागरिकता, तब भी और अब भी, अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बनने का एक संप्रभु अधिकार है। 14वें संशोधन को बनाने वालों ने इस देश की धरती पर पैदा हुए हर एक व्यक्ति से यह पवित्र वादा किया था। हम आज भी उस संवैधानिक वादे को पूरी मजबूती से बरकरार रख रहे हैं।”

ट्रंप प्रशासन की दलील को कोर्ट ने क्यों नकारा?

अदालत में ट्रंप प्रशासन के सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी थी कि 14वां संशोधन गृहयुद्ध (Civil War) के बाद केवल पूर्व दासों और उनके वंशजों को अधिकार देने के लिए लाया गया था, इसका फायदा अवैध प्रवासियों या विदेशी पर्यटकों को नहीं मिलना चाहिए।

हालांकि, जजों की पीठ ने संघीय कानूनों और लंबे समय से चली आ रही संवैधानिक व्याख्याओं के आधार पर इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ किया कि कुछ बेहद सीमित अपवादों (जैसे विदेशी राजनयिकों के बच्चे) को छोड़कर, अमेरिका की सीमा के भीतर जन्म लेने वाला हर बच्चा जन्म से ही अमेरिकी नागरिक है और सरकार इसे नहीं छीन सकती।

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