
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में स्थानीय निकाय चुनावों के पहले चरण के दौरान अचानक भयावह हिंसा और खून-खराबा शुरू हो गया है। राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव में खुलेआम धांधली के आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी से रावलकोट और कोटली जैसे शांतिपूर्ण इलाके युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गए हैं।
रावलकोट की सड़कों पर भारी तबाही
रावलकोट में विगत 52 दिनों से चल रहे ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) के नागरिक अधिकार आंदोलन को दबाने के लिए पाक रेंजर्स ने प्रदर्शनकारियों पर कथित रूप से सीधी अंधाधुंध फायरिंग कर दी। चश्मदीदों के अनुसार, गोलीबारी में दर्जनों लोग हताहत हुए हैं और घायलों को अस्पतालों तक पहुँचाने के लिए एम्बुलेंस व वाहन भी कम पड़ रहे हैं।
कोटली में हत्या और बूथ कैप्चरिंग का आरोप
मीरपुर डिवीजन की 13 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान के दौरान कोटली के निक्याल में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के एक कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बिलावल भुट्टो-जरदारी ने विरोधी दल पर बूथ कैप्चरिंग के सीधे आरोप लगाए हैं, जबकि इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने इस पूरे चुनाव प्रक्रिया का पूर्ण बहिष्कार किया है।
जन-आक्रोश और मुख्य मांगें
क्षेत्र में यह भारी जनाक्रोश अचानक उत्पन्न नहीं हुआ है। नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं की गैर-कानूनी गिरफ्तारियाँ, बिजली-पानी की भारी किल्लत, महंगाई और स्थानीय संसाधनों के शोषण के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे हैं। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई जा रही है।
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