पश्चिमी यूपी में बसपा की बड़ी सर्जरी: मेरठ मंडल में मायावती का बड़ा फेरबदल, पूर्व सांसद मुनकाद अली समेत बदले कई जिलों के प्रभारी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपने पारंपरिक राजनीतिक गढ़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांगठनिक ढांचे को नए सिरे से धार देना शुरू कर दिया है। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के निर्देश पर मेरठ मंडल में व्यापक संगठनात्मक फेरबदल किया गया है। इस बड़े बदलाव के तहत पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद मुनकाद अली के साथ-साथ मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, बागपत, बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) जैसे प्रमुख जिलों के मंडल व जिला प्रभारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल किया गया है। पार्टी नेतृत्व ने कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के कार्यक्षेत्र बदलते हुए संगठन में युवा और सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।

मुनकाद अली और पुराने क्षत्रपों के कार्यक्षेत्र में बदलाव

बसपा में लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्दावर मुस्लिम चेहरे के तौर पर पहचाने जाने वाले पूर्व राज्यसभा सांसद मुनकाद अली की संगठनात्मक जिम्मेदारियों में फेरबदल को सियासी गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है। मुनकाद अली पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष से लेकर मुख्य जोनल को-ऑर्डिनेटर जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। संगठन में संतुलन साधने और पश्चिमी क्षेत्र के अलग-अलग मंडलों में पार्टी की पकड़ मजबूत करने के इरादे से केंद्रीय नेतृत्व ने वरिष्ठ नेताओं के प्रभार बदले हैं। इस बदलाव का उद्देश्य केवल किसी नेता का कद घटाना या बढ़ाना नहीं, बल्कि मंडल स्तर पर नई ऊर्जा का संचार करना और नेताओं की जवाबदेही तय करना है।

मेरठ मंडल के जिलों में प्रभारियों की नई तैनाती

संगठनात्मक समीक्षा बैठक के बाद जारी किए गए निर्देशों के अनुसार मेरठ मंडल के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों में प्रभारियों की नई सूची तैयार की गई है:

  • मेरठ जिला व महानगर: मेरठ में जमीनी स्तर पर कैडर कैंपों को गति देने के लिए जिला व मुख्य सेक्टर प्रभारियों में बदलाव किया गया है। शहर से लेकर देहात विधानसभाओं में नए पदाधिकारियों को सेक्टरवार जिम्मेदारी दी गई है।

  • गाजियाबाद और हापुड़: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से सटे गाजियाबाद और हापुड़ जिलों में संगठन को मजबूत करने के लिए नए जिला प्रभारियों की घोषणा की गई है, ताकि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय बन सके।

  • बुलंदशहर और बागपत: ग्रामीण बहुल क्षेत्रों में संगठन की पकड़ मजबूत करने के लिए स्थानीय सामाजिक समीकरणों के आधार पर पदाधिकारियों का दायित्व तय किया गया है।

  • गौतमबुद्ध नगर: औद्योगिक और शहरी मतदाताओं के साथ-साथ ग्रामीण सेक्टरों में पार्टी के विस्तार के लिए नई समन्वय समिति को कमान दी गई है।

दलित-मुस्लिम और सर्वजन समीकरण को फिर से साधने की कवायद

मेरठ मंडल हमेशा से बसपा की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है। इस क्षेत्र में दलित और मुस्लिम मतदाताओं की आबादी निर्णायक भूमिका निभाती रही है। हालिया चुनावों में विपक्षी दलों द्वारा इस वोट बैंक में लगाई गई सेंध के बाद पार्टी नेतृत्व अपने मूल सामाजिक आधार को एकजुट करने के लिए लगातार प्रयासरत है। मुनकाद अली जैसे वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं के अनुभव का उपयोग व्यापक स्तर पर करने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर अति पिछड़े वर्गों (OBC) और सर्वसमाज के युवाओं को मंडल व जिला कमेटियों में स्थान दिया जा रहा है। पार्टी का स्पष्ट संदेश है कि भाईचारा कमेटियों को केवल कागजों तक सीमित न रखकर सीधे जनता के बीच ले जाया जाए।

बूथ और सेक्टर स्तर पर संगठन की रीस्ट्रक्चरिंग

मंडल स्तर पर हुए इस फेरबदल के साथ ही सभी नवनियुक्त प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे जिलों में जाकर सबसे पहले बूथ कमेटियों और सेक्टर कमेटियों की समीक्षा करें। बसपा की कार्यशैली हमेशा से कैडर आधारित रही है, जहां बूथ स्तर का कार्यकर्ता पार्टी की सबसे बड़ी ताकत होता है। प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि वे निष्क्रिय पदाधिकारियों की जगह सक्रिय और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपें। इसके अलावा, गांव-गांव और कस्बों में नियमित कैडर कैंप आयोजित कर पार्टी के सिद्धांतों और नीतियों से युवाओं को जोड़ने का अभियान चलाया जाएगा।

आगामी चुनावी चुनौतियों और पश्चिमी यूपी का सियासी परिदृश्य

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच जारी कड़े मुकाबले में बसपा अपनी स्वतंत्र और मजबूत स्थिति बनाए रखना चाहती है। पिछले कुछ चुनावों में संगठन की सुस्ती को दूर करने के लिए मायावती लगातार सांगठनिक स्तर पर कड़े फैसले ले रही हैं। मेरठ मंडल में हुआ यह फेरबदल इसी विस्तृत रणनीति का हिस्सा है, जिससे पार्टी आगामी स्थानीय निकाय, पंचायत और आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए अपना मजबूत आधार तैयार कर सके।

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