लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब बस का सफर केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक शानदार अनुभव बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 49 बस स्टेशनों को हाईटेक बनाने के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी गई है। इन बस अड्डों को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, जहां यात्रियों को शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर और वीआईपी लाउंज जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। खास बात यह है कि इस पूरी परियोजना से सरकारी खजाने पर एक रुपये का भी बोझ नहीं पड़ेगा।
पीपीपी मॉडल पर होगा ‘एयरपोर्ट’ जैसा विकास
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि यह परियोजना पीपीपी (Public-Private Partnership) के तहत ‘डिजाइन, बिल्ट, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (DBFOT) मॉडल पर आधारित है।
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निवेश: इस दूसरे चरण में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आने का अनुमान है।
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सुविधाएं: बस स्टेशनों के कुल क्षेत्रफल का 55% हिस्सा सार्वजनिक सुविधाओं (वेटिंग हॉल, टॉयलेट्स) और 45% हिस्सा व्यावसायिक गतिविधियों (दुकानें, फूड कोर्ट, सिनेमा हॉल) के लिए इस्तेमाल होगा।
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लीड टाइम: निवेशकों को आकर्षित करने के लिए काम शुरू करने की समय सीमा 6 माह से बढ़ाकर 12 माह कर दी गई है।
निवेशकों के लिए आसान हुईं शर्तें, 52 जिले होंगे कवर
सरकार ने इस बार टेंडर प्रक्रिया में निवेशकों के लिए नियमों को काफी सरल बनाया है। परियोजनाओं को पूरा करने की अवधि 5 से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दी गई है। पहले चरण में लखनऊ, कानपुर और आगरा जैसे 23 स्टेशनों को मंजूरी मिल चुकी थी। अब दूसरे चरण के 49 बस अड्डों के शामिल होने से प्रदेश के 52 जिले इस योजना के दायरे में आ जाएंगे। बाकी बचे 23 जिलों को अगले चरण में कवर किया जाएगा।
हाथरस, बुलंदशहर और बलरामपुर को नए बस अड्डों की सौगात
कैबिनेट ने तीन महत्वपूर्ण स्थानों पर नए बस स्टेशनों के निर्माण के लिए निःशुल्क भूमि हस्तांतरण को भी मंजूरी दी है:
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सिकंदराराऊ (हाथरस): नया आधुनिक बस स्टेशन बनेगा।
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नरौरा (बुलंदशहर): यहां बस स्टेशन के साथ-साथ एक डिपो कार्यशाला भी स्थापित की जाएगी।
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तुलसीपुर (बलरामपुर): प्रसिद्ध देवीपाटन मंदिर के पास श्रद्धालुओं और यात्रियों की सुविधा के लिए हाईटेक बस स्टेशन बनेगा।
यात्रियों की बढ़ती संख्या और सुविधाओं का तालमेल
परिवहन मंत्री के अनुसार, यूपी रोडवेज की बसों से प्रतिदिन 15 से 23 लाख लोग सफर करते हैं, जो त्योहारों के दौरान 35 लाख तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में बस अड्डों को ‘इकोनॉमिक हब’ के रूप में विकसित करने से न केवल यात्रियों को बैठने और मनोरंजन की जगह मिलेगी, बल्कि शहरों के मुख्य बस अड्डों पर होने वाली अफरातफरी और भीड़भाड़ में भी कमी आएगी। इन स्टेशनों पर 2.5 फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) की निःशुल्क अनुमति दी गई है, जिससे ऊंची और भव्य इमारतें बन सकेंगी।
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