Lekin…: बॉक्स ऑफिस पर पिटी थी ‘गब्बर’ अमजद खान की यह फिल्म, बाद में बटोरे 4 नेशनल अवॉर्ड; गाना ‘यारा सिली सिली’ आज भी है सुपरहिट

नई दिल्ली/मुंबई: भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसी कई फिल्में रही हैं जो अपनी रिलीज के वक्त बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को तरस गईं, लेकिन समय के साथ उन्हें ‘क्लासिक’ का दर्जा मिला। ऐसी ही एक बेहतरीन और रूहानी फिल्म साल 1990 में रिलीज हुई थी, जिसने बॉक्स ऑफिस पर भले ही दम तोड़ दिया था, लेकिन जब देश के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों की घोषणा हुई, तो इस फिल्म ने एक-दो नहीं बल्कि पूरे 4 नेशनल अवॉर्ड्स (राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार) अपने नाम कर इतिहास रच दिया था।

इस फिल्म की सबसे खास बात यह थी कि इसमें ‘शोले’ के खूंखार डाकू ‘गब्बर सिंह’ यानी दिग्गज अभिनेता अमजद खान (Amjad Khan) एक बेहद अलग और अनूठे किरदार में नजर आए थे। अगर आप अब तक इस फिल्म का नाम नहीं पहचान पाए हैं, तो आपको बता दें कि इस कल्ट क्लासिक फिल्म का नाम है— ‘लेकिन…’।

गुलजार के निर्देशन में बनी जादुई और रहस्यमयी दुनिया

मशहूर शायर, गीतकार और निर्देशक गुलजार (Gulzar) द्वारा लिखित और निर्देशित फिल्म ‘लेकिन…’ एक हिंदी म्यूजिकल मिस्ट्री ड्रामा थी। फिल्म में अमजद खान के साथ-साथ बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना और खूबसूरत डिंपल कपाड़िया मुख्य भूमिकाओं में थे। इस फिल्म को सिनेमाघरों तक पहुंचने में पूरे चार साल का लंबा वक्त लगा था। क्रिटिक्स से बेहद शानदार रिव्यूज मिलने के बावजूद यह फिल्म टिकट खिड़की पर व्यावसायिक रूप से फ्लॉप साबित हुई थी।

जब फिल्म ने नेशनल अवॉर्ड्स में गाड़े सफलता के झंडे

भले ही फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों का साथ नहीं मिला, लेकिन इसकी कलात्मकता और बेहतरीन संगीत ने इसे अमर बना दिया। फिल्म ‘लेकिन…’ ने 4 श्रेणियों में राष्ट्रीय पुरस्कार जीते:

  • बेस्ट प्लेबैक सिंगर (फीमेल): स्वर कोकिला लता मंगेशकर।

  • बेस्ट लिरिक्स (सर्वश्रेष्ठ गीतकार): गुलजार (गीत ‘यारा सिली सिली’ के लिए)।

  • बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर: हृदयनाथ मंगेशकर।

  • बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइनर: ऑस्कर विजेता भानु अथैया।

क्या था इस फिल्म का रहस्यमयी प्लॉट?

फिल्म की कहानी समीर नियोगी (विनोद खन्ना) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें सरकार राजस्थान के एक दूरदराज इलाके में स्थित राजा परम सिंह के पुराने और ऐतिहासिक महल की संपत्तियों का जायजा लेने का काम सौंपती है। समीर जब ट्रेन से वहां जा रहे होते हैं, तो रास्ते में एक रहस्यमयी महिला रेवा (डिंपल कपाड़िया) उनके केबिन में शरण लेती है, लेकिन समीर के जागने से पहले ही वह अचानक गायब हो जाती है।

ट्विस्ट तब आता है जब समीर उस वीरान महल में पहुंचते हैं और वहां उन्हें वही ट्रेन वाली महिला खाना बनाते हुए मिलती है। इसके बाद समीर के साथ उस महल में कई अजीबोगरीब और अलौकिक घटनाएं घटने लगती हैं। फिल्म में आलोकनाथ, मुनमुन सेन, बीना बनर्जी और गेस्ट अपीयरेंस में हेमा मालिनी भी नजर आई थीं। वर्तमान में इस फिल्म की आईएमडीबी (IMDb) रेटिंग 7.8 है।

‘यारा सिली सिली’… वो 9 गाने जो आज भी कानों में मिश्री घोलते हैं

हृदयनाथ मंगेशकर के संगीत से सजी इस फिल्म का म्यूजिक एल्बम आज भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद है। फिल्म में कुल 9 गाने थे, जिनमें ‘यारा सिली सिली’ आज भी मील का पत्थर माना जाता है। यहाँ देखें गानों की पूरी सूची:

गाने का नाम मुख्य गायक अवधि
केसरिया बालमा ओजी के तुमसे लागे नैन (वर्जन 1) लता मंगेशकर 5 मिनट 24 सेकेंड
केसरिया बालमा ओजी के तुमसे लागे नैन (वर्जन 2) लता मंगेशकर 6 मिनट 08 सेकेंड
सुरमई शाम सुरेश वाडकर 5 मिनट 50 सेकेंड
यारा सिली सिली लता मंगेशकर 5 मिनट 05 सेकेंड
सुनियो जी अरज लता मंगेशकर 5 मिनट 04 सेकेंड
झूठे नैना आशा भोसले और सत्यशील देशपांडे 6 मिनट 18 सेकेंड
मैं एक सदी से लता मंगेशकर 5 मिनट 32 सेकेंड
जा जा रे लता मंगेशकर और हृदयनाथ मंगेशकर 3 मिनट 17 सेकेंड
दिल में लेकर तुम्हारी याद चले लता मंगेशकर 4 मिनट 00 सेकेंड

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