नई दिल्ली/वाराणसी: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र का महीना आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह न केवल भारतीय कैलेंडर का प्रथम मास है, बल्कि इसी महीने से हिंदू नववर्ष यानी ‘विक्रम संवत 2083’ का आरंभ भी होगा। इस वर्ष चैत्र का महीना कई शुभ योगों और बड़े त्योहारों की सौगात लेकर आ रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी महीने की प्रतिपदा तिथि को ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। आइए जानते हैं इस पावन महीने की सही तारीख, नियम और किन देवी-देवताओं की पूजा से चमकेगा आपका भाग्य।
कब से शुरू हो रहा है चैत्र मास 2026?
पंचांग गणना के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा के अगले दिन से चैत्र मास का प्रारंभ हो जाता है। वर्ष 2026 में चैत्र मास का आरंभ 4 मार्च, बुधवार से हो रहा है, जो कि 1 अप्रैल, बुधवार तक चलेगा। इस दौरान 19 मार्च को चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होगा और इसी दिन ‘नव संवत्सर’ भी मनाया जाएगा। ऋतु परिवर्तन के इस दौर में चैत्र मास का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी समय वसंत ऋतु अपने चरम पर होती है।
इन देवी-देवताओं की उपासना दिलाएगी कष्टों से मुक्ति
चैत्र मास के दौरान मुख्य रूप से भगवान विष्णु और शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की पूजा का विधान है।
-
भगवान सूर्य: इस महीने में सूर्य देव की उपासना और उन्हें अर्घ्य देने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।
-
मां दुर्गा: चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है।
-
हनुमान जी: चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है, जो संकटों को दूर करने वाली मानी गई है।
-
भगवान राम: चैत्र शुक्ल नवमी को राम नवमी का महापर्व मनाया जाता है, जिसमें मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जन्मोत्सव धूमधाम से होता है।
चैत्र के महीने में ‘क्या करें’ और ‘क्या न करें’
शास्त्रों में इस महीने के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से सुख-समृद्धि आती है:
-
क्या करें: चैत्र मास में प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पित करें। इस महीने में नीम की कोमल पत्तियों का सेवन करना उत्तम माना गया है, क्योंकि यह रक्त को शुद्ध करती हैं। प्यासे को पानी पिलाना और गुड़-अनाज का दान करना महापुण्यदायी होता है।
-
क्या न करें: चैत्र मास से धीरे-धीरे गर्मी बढ़ने लगती है, इसलिए भारी और गरिष्ठ भोजन (तला-भुना) करने से बचना चाहिए। इस महीने में गुड़ का सेवन कम करना चाहिए। इसके अलावा, तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) और प्याज-लहसुन का त्याग करना श्रेयस्कर रहता है।
व्रत और त्योहारों की रहेगी धूम
चैत्र का पूरा महीना पर्वों से भरा है। इसमें पापमोचनी एकादशी, चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा, राम नवमी और कामदा एकादशी जैसे बड़े व्रत आएंगे। ज्योतिषियों के अनुसार, इस महीने में दान-पुण्य करने से कुंडली के कई दोष शांत हो जाते हैं और पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया