तेहरान/दुबई। मध्य पूर्व (Middle East) के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में शनिवार को स्थिति बेहद विस्फोटक हो गई। खबर है कि जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहे कम से कम दो व्यापारी जहाजों पर ईरानी गनबोट्स ने अंधाधुंध गोलीबारी की है। ब्रिटिश सैन्य सूत्रों के अनुसार, एक तेल टैंकर को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। इस घटना के तुरंत बाद ईरान ने इस रणनीतिक मार्ग पर दोबारा ‘पूर्ण सैन्य नियंत्रण’ लागू करने का ऐलान कर दिया है।
8 टैंकरों का काफिला गुजरते ही हुई फायरिंग
समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पिछले कई हफ्तों के गतिरोध के बाद शनिवार को 8 तेल टैंकरों का एक बड़ा काफिला होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा था।
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गोलीबारी की घटना: जैसे ही जहाजों ने जलमार्ग में प्रवेश किया, ईरानी गनबोट्स ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी।
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नुकसान का आकलन: अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जहाजों को कितना भौतिक नुकसान हुआ है, लेकिन इस हमले ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों के बीच हड़कंप मचा दिया है।
ईरान का पलटवार: ‘अमेरिका ने तोड़ा भरोसा’
ईरान के सशस्त्र बलों ने जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने और सख्त नियंत्रण के पीछे अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान का दावा है कि:
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अमेरिका ‘नाकाबंदी’ (Blockade) के नाम पर नियमों का लगातार उल्लंघन कर रहा है।
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पहले दी गई रियायतें सशर्त थीं, लेकिन अमेरिकी गतिविधियों के कारण सुरक्षा संकट पैदा हो गया है।
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ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सख्त संदेश देते हुए कहा है कि उनकी नौसेना दुश्मनों को “कड़वी हार” देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ट्रम्प की ‘अच्छी खबर’ और बुधवार की डेडलाइन
इस तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने संकेत दिया था कि ईरान को लेकर कुछ “अच्छी खबर” हो सकती है, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी।
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युद्धविराम का अंत: इजराइल और लेबनान के बीच हुआ 10-दिवसीय युद्धविराम अगले कुछ दिनों में खत्म होने वाला है।
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बड़ी चेतावनी: ट्रम्प ने संकेत दिया कि यदि बुधवार तक कोई स्थायी शांति समझौता नहीं हुआ, तो क्षेत्र में फिर से बड़े पैमाने पर संघर्ष शुरू हो सकता है।
दुनिया के लिए क्यों चिंता का विषय है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। यहां होने वाली कोई भी सैन्य गतिविधि सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा सकती है।
ईरान द्वारा फिर से सैन्य नियंत्रण लागू करने और जहाजों पर गोलीबारी की घटना ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। अब सबकी नजरें अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
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