दुबई/वॉशिंगटन: खाड़ी क्षेत्र में तनाव उस वक्त चरम पर पहुँच गया जब एक चीनी टैंकर ने ईरान पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को सीधा चुनौती दी। 13 अप्रैल को अमेरिका द्वारा ईरान के तेल व्यापार को ठप करने के लिए लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और नाकेबंदी के ठीक बाद, चीनी स्वामित्व वाले टैंकर ‘रिच स्टारी’ (Rich Starry) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर इस नाकेबंदी की ‘परीक्षा’ ली।
क्या है पूरा घटनाक्रम? ‘माइंड गेम’ या तकनीकी चाल?
रिपोर्ट्स के अनुसार, शंघाई ‘Xuanrun’ शिपिंग कंपनी का यह टैंकर लगभग 2.5 लाख बैरल मेथेनॉल लेकर होर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़ा।
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पहला प्रयास: टैंकर पहले स्ट्रेट के करीब पहुँचा, लेकिन नाकेबंदी को देखते हुए वापस मुड़ गया।
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सफलता: कुछ घंटों के इंतजार के बाद, टैंकर फिर से आगे बढ़ा और सफलतापूर्वक खाड़ी से बाहर निकल गया।
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यू-टर्न और रहस्य: बाहर निकलने के बाद टैंकर ने अचानक ‘यू-टर्न’ ले लिया। दिलचस्प बात यह है कि इसका गंतव्य पहले ओमान का एक बंदरगाह था, जिसे बाद में बदल दिया गया। इस दौरान टैंकर ने अपनी चीनी पहचान को जानबूझकर सार्वजनिक (Broadcasting) रखा।
कौन है ‘रिच स्टारी’ और क्यों है खास?
रिच स्टारी कोई साधारण टैंकर नहीं है। इसे 2023 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित किया जा चुका है। अमेरिका का आरोप है कि यह टैंकर ईरान को वैश्विक प्रतिबंधों से बचने और तेल व केमिकल की तस्करी में मदद करता रहा है। नाकेबंदी के बावजूद इस टैंकर का सफलतापूर्वक निकल जाना अमेरिकी दावों और नाकेबंदी की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है।
चीन और अमेरिका के बीच जुबानी जंग तेज
इस घटना ने बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच कूटनीतिक तनाव को और हवा दे दी है।
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चीन का रुख: चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने अमेरिका की इस नाकेबंदी की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे ‘गैर-जिम्मेदाराना’ और ‘खतरनाक’ बताते हुए चेतावनी दी कि इससे पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं।
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बाजार पर असर: होर्मुज स्ट्रेट से इस तरह की गतिविधियों के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। शिपिंग कंपनियां अब इस मार्ग पर अपने जहाजों को भेजने से पहले अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20-25% हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है। ईरान इसे अपना प्रभाव क्षेत्र मानता है, जबकि अमेरिका अपनी नौसैनिक मौजूदगी के जरिए यहां से होने वाले व्यापार पर नियंत्रण और ईरान पर दबाव बनाना चाहता है।
चीनी टैंकर की इस हरकत को विशेषज्ञों द्वारा अमेरिका के ‘अधिकार क्षेत्र’ को परखने और यह संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है कि चीन अपने व्यापारिक हितों के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों को चुनौती देने से पीछे नहीं हटेगा।
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