मुंबई। एक अच्छी और मुकम्मल फिल्म बनाने में अमूमन महीनों या कभी-कभी सालों का वक्त लग जाता है। स्क्रिप्ट राइटिंग, प्री-प्रोडक्शन, हफ्तों तक चलने वाली शूटिंग और फिर लंबा पोस्ट-प्रोडक्शन (एडिटिंग व डबिंग)—ये किसी भी फिल्म निर्माण की एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन भारतीय सिनेमा (विशेषकर साउथ फिल्म इंडस्ट्री) के इतिहास में एक ऐसा चमत्कार भी दर्ज है, जिसे सुनकर आज के बड़े-बड़े फिल्ममेकर्स भी दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं। आज हम आपको एक ऐसी फिल्म के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे सिर्फ 23 घंटे और 58 मिनट में शुरू से लेकर अंत तक बनाकर तैयार कर दिया गया था और यह बॉक्स ऑफिस पर एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी।
14 डायरेक्टर्स, 19 कैमरामैन और 8 लोकेशंस: एक अनोखा लॉजिस्टिक एक्सपेरिमेंट
इस ऐतिहासिक और रिकॉर्डतोड़ तमिल फिल्म का नाम है ‘सुयमवरम’ (Suyamvaram), जो साल 1999 में रिलीज हुई थी। यह कोई कम बजट वाली शॉर्ट फिल्म नहीं थी, बल्कि एक बहुत बड़ा लॉजिस्टिक और सिनेमाई एक्सपेरिमेंट था। इस फिल्म को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए पूरी साउथ फिल्म इंडस्ट्री एक छत के नीचे आ गई थी।
इस फिल्म के निर्माण से जुड़े हैरान कर देने वाले आंकड़े नीचे दी गई तालिका में व्यवस्थित हैं:
| फिल्म निर्माण के मुख्य घटक | कुल संख्या / विवरण |
| कुल निर्माण समय (Time Taken) | 23 घंटे 58 मिनट (इसी दौरान राइटिंग, शूटिंग और एडिटिंग पूरी हुई)। |
| दिग्गज निर्देशक (Directors) | 14 बड़े डायरेक्टर्स ने अलग-अलग सीन्स को एक साथ संभाला। |
| कैमरामैन और एडिटर्स | 19 कैमरामैन और 4 एडिटर्स चौबीसों घंटे काम पर मुस्तैद रहे। |
| म्यूजिक कंपोजर्स | 4 म्यूजिक कंपोजर्स ने मिलकर फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और संगीत तैयार किया। |
| शूटिंग लोकेशंस | एक ही वक्त पर 8 अलग-अलग लोकेशंस पर पैरेलल शूटिंग चल रही थी। |
सेट पर नहीं थी कोई स्क्रिप्ट, दिग्गज कलाकार भी रह गए हैरान
इस फिल्म की सबसे मजेदार और अनोखी बात यह थी कि सेट पर किसी भी अभिनेता या निर्देशक के पास कोई लिखित स्क्रिप्ट नहीं थी और न ही रिहर्सल करने का कोई समय था। एक्टर्स सीधे सेट पर आते थे, निर्देशक उन्हें मौके पर ही सीन और सिचुएशन समझाते थे और कलाकार तुरंत वन-टेक में शॉट ओके कर देते थे।
इस फिल्म में उस दौर के 25 से ज्यादा दिग्गज सुपरस्टार्स की फौज खड़ी की गई थी, जिनमें प्रभु, सत्यराज, अब्बास, कार्तिक, प्रभु देवा, अर्जुन, रोजा, रंभा, खुशबू, देवयानी और सिमरन जैसे बड़े नाम शामिल थे। इस अद्भुत सिनेमाई प्रयोग को देखने के लिए खुद तमिल सिनेमा के दो सबसे बड़े स्तंभ— रजनीकांत और कमल हासन सेट पर पहुंचे थे।
क्या थी फिल्म ‘सुयमवरम’ की कहानी?
इतनी आपाधापी में बनने के बावजूद फिल्म की कहानी बेहद मनोरंजक और फुल-ऑन कॉमेडी-ड्रामा से भरपूर थी:
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पिता की आखिरी ख्वाहिश: कहानी एक बेहद अमीर बुजुर्ग (विजयाकुमार) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ता है। डॉक्टर जवाब दे देते हैं कि उनके पास अब बहुत कम समय बचा है।
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9 बच्चों की एक मंडप में शादी: बुजुर्ग पिता अपने मरने से पहले अपने सभी 9 बच्चों (3 बेटे और 6 बेटियां) की शादी एक ही मंडप में, एक साथ होते हुए देखना चाहते हैं। इसके लिए बकायदा अखबारों में विज्ञापन दिया जाता है, जिसे देखकर अजीबोगरीब दूल्हे और दुल्हनों की लाइन लग जाती है।
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ट्विस्ट और कन्फ्यूजन: असली ट्विस्ट तब आता है जब पता चलता है कि लगभग सभी 9 बच्चे पहले से ही किसी न किसी से गुपचुप प्यार करते हैं। इसके बाद शादी के मंडप में भयंकर कन्फ्यूजन, थ्रिलर ड्रामा, गजब की कॉमेडी और आखिरी में एक बम ब्लास्ट का सस्पेंस दर्शकों को लोटपोट कर देता है।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज और बॉक्स ऑफिस पर छप्परफाड़ कमाई
आमतौर पर जो फिल्में महज रिकॉर्ड बनाने के लिए बहुत तेजी से बनाई जाती हैं, वे कलात्मक रूप से कमजोर होती हैं और दर्शकों को पसंद नहीं आतीं। लेकिन ‘सुयमवरम’ के साथ ऐसा नहीं था। यह फिल्म न सिर्फ गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness Book of World Records) में सबसे तेज फिल्म बनने के रूप में दर्ज हुई, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी इसने कमाई के झंडे गाड़ दिए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उस दौर में इस मेगा-प्रोजेक्ट को तकरीबन ₹25 करोड़ की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया था और जब यह सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो दर्शकों ने इसे हाथों-हाथ लिया। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी लागत से दोगुनी यानी कुल ₹50 करोड़ से अधिक की ब्लॉकबस्टर कमाई कर इतिहास रच दिया था।
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