
भारत के ठीक पड़ोसी मुल्क नेपाल में इस समय भयंकर और तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं, जहां दो अलग-अलग धार्मिक समुदायों के बीच उपजा विवाद भीषण सांप्रदायिक हिंसा में तब्दील हो चुका है। देश के कई हिस्सों में आगजनी, पथराव और हिंसक प्रदर्शनों के चलते हालात पूरी तरह बेकाबू होते नजर आ रहे हैं, जिसके कारण प्रशासन को कई जिलों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस खौफनाक हिंसा में अब तक कम से कम 3 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सुरक्षाकर्मियों समेत दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने खुद कमान संभाल ली है और देशवासियों से शांति तथा संयम बनाए रखने की पुरजोर अपील की है, जबकि राजधानी काठमांडू में इस संकट से निपटने के लिए एक उच्चस्तरीय सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है।
तराई क्षेत्र में बढ़ा तनाव, चार जिलों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू और हिंसा का दायरा
नेपाल के दक्षिणी तराई क्षेत्र में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, जिसके चलते शुक्रवार को भारत की सीमा से लगे सप्तारी जिले में भी अनिश्चितकालीन कर्फ्यू बढ़ा दिया गया है। ताजा प्रशासनिक आदेशों के अनुसार, अब पाबंदी और कर्फ्यू वाले जिलों की संख्या बढ़कर कुल चार हो गई है, जिसमें सप्तारी के अलावा सुनसरी, धनुषा और सिराहा जिले भी शामिल हैं। जिला प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, स्थिति को किसी तरह नियंत्रण में रखने के लिए गोलबाजार क्षेत्र में लगाए गए अनिश्चितकालीन कर्फ्यू को गुरुवार को आगे बढ़ाते हुए लहान नगरपालिका तक लागू कर दिया गया। यह पूरा बवांडर तब और भड़क गया जब गोलबाजार इलाके में विभिन्न प्रदर्शनकारियों ने हिंसक प्रदर्शनों के दौरान एक बड़े शॉपिंग मॉल को भी आग के हवाले कर दिया, जिससे स्थानीय कारोबारियों और आम नागरिकों में भारी दहशत फैल गई है।
कैसे भड़की हिंसा? उत्सव के विवाद से लेकर पुलिस फायरिंग और तीन मौतों की खौफनाक दास्तान
इस पूरे संघर्ष की शुरुआत पिछले रविवार को सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका के कप्तानगंज इलाके में हुई थी, जहां एक उत्सव के आयोजन को लेकर दो धार्मिक समुदायों के बीच मामूली बात पर कहासुनी और फिर हिंसक झड़पें शुरू हो गई थीं। भीड़ को तितर-बितर करने और कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए जब पुलिस मौके पर पहुंची और सुरक्षाकर्मियों ने बल प्रयोग करते हुए गोलीबारी की, तो एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई और सुरक्षाकर्मियों समेत एक दर्जन से अधिक लोग जख्मी हो गए। यह हिंसा धीरे-धीरे मधेश क्षेत्र तक फैल गई, जहां गुरुवार को सिराहा जिले में एक किशोर की भी मौत हो गई, जबकि सुनसरी की हिंसा के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए एक अन्य शख्स ने कोशी क्षेत्र के अस्पताल में दम तोड़ दिया। इसके अलावा, हिंसक झड़पों के दौरान एक पुलिस कॉन्स्टेबल नारद पेरियार को भी गोली लगने की खबर है, जो यह दर्शाता है कि उपद्रवियों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष किस हद तक खतरनाक मोड़ ले चुका है।
पीएम बालेन शाह का राष्ट्र के नाम संदेश, सर्वदलीय बैठक और अफवाहों के खिलाफ सख्त चेतावनी
बिगड़ते हालातों को देखते हुए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने टेलीविजन के माध्यम से राष्ट्र के नाम एक अहम संबोधन दिया और देशवासियों से अमन-चैन बनाए रखने की अपील की। पीएम शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार हालिया हिंसा की पूरी, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करेगी ताकि इस त्रासद घटना के लिए जो भी लोग और उपद्रवी तत्व जिम्मेदार हैं, उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा कर जवाबदेह ठहराया जा सके। स्थिति पर काबू पाने के लिए काठमांडू में एक आपातकालीन सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ मिलकर तनाव कम करने के उपायों पर चर्चा जारी है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने नागरिकों से विशेष रूप से यह अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल मंचों के जरिए किसी भी प्रकार की भ्रामक अफवाहों, गलत जानकारियों या नफरत फैलाने वाले बयानों को साझा करने से पूरी तरह बचें, ताकि समाज में और अधिक विद्वेष न फैले।
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