असम में चुनाव से पहले कांग्रेस का ‘किला’ ढहा, दिग्गज नेता के बीजेपी में जाते ही बेटे ने छोड़ी उम्मीदवारी, बड़ा सियासी भूचाल…

गुवाहाटी/नई दिल्ली। असम विधानसभा चुनाव के रण के बीच कांग्रेस को एक ऐसा करारा झटका लगा है, जिसने पार्टी की चुनावी रणनीति की चूलें हिलाकर रख दी हैं। राज्य के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थामते ही सियासी समीकरण पूरी तरह पलट गए हैं। पिता के पाला बदलने के ठीक बाद, कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार और प्रद्युत के बेटे प्रतीक बोरदोलोई ने भी मैदान छोड़ दिया है। प्रतीक ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का औपचारिक ऐलान कर दिया है, जिससे कांग्रेस खेमे में भारी हड़कंप मच गया है और पार्टी नेतृत्व के सामने अब अपनी साख बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

पिता ने थामा कमल तो बेटे ने छोड़ी कांग्रेस की नैया

असम की राजनीति में बोरदोलोई परिवार का एक बड़ा कद माना जाता है, लेकिन चुनाव की ऐन दहलीज पर हुए इस घटनाक्रम ने कांग्रेस को बैकफुट पर धकेल दिया है। प्रद्युत बोरदोलोई का बीजेपी में शामिल होना महज एक दलबदल नहीं, बल्कि कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर एक बड़ी चोट माना जा रहा है। जैसे ही पिता ने ‘कमल’ का साथ पकड़ा, बेटे प्रतीक बोरदोलोई ने भी कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में अपनी दावेदारी पीछे खींच ली। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल संबंधित विधानसभा सीट बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी कांग्रेस का वोट बैंक बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

कांग्रेस की चुनावी तैयारियों को लगा बड़ा झटका

प्रतीक बोरदोलोई के उम्मीदवारी वापस लेने के बाद असम कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और वफादारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चुनाव प्रचार जब अपने चरम पर है, तब एक मजबूत उम्मीदवार का मैदान से हट जाना पार्टी के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी ने इस मौके को भुनाते हुए कांग्रेस पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस के अपने ही नेताओं को अब पार्टी की विचारधारा और भविष्य पर भरोसा नहीं रहा है। इस टूट के बाद अब कांग्रेस को आनन-फानन में नए चेहरे की तलाश करनी होगी, जो इतने कम समय में बेहद मुश्किल काम नजर आ रहा है।

क्या होगा असम का अगला सियासी समीकरण?

बोरदोलोई परिवार के इस फैसले ने असम की सत्ता की लड़ाई को और भी दिलचस्प बना दिया है। प्रद्युत बोरदोलोई का प्रभाव केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, ऐसे में उनके बीजेपी में जाने से पार्टी को ऊपरी और मध्य असम में बढ़त मिलने की उम्मीद है। प्रतीक बोरदोलोई के हटने से उस सीट पर अब मुकाबला एकतरफा होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या आने वाले दिनों में कांग्रेस के कुछ और बड़े चेहरे भी इसी राह पर चल सकते हैं। फिलहाल, असम की इस ‘बोरदोलोई सुनामी’ ने चुनाव की पूरी तस्वीर ही बदलकर रख दी है।

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